Unsplash वो लम्हे जो अश्कों में पिघल गए थे,
ख़ामोशी की रातों में बहल गए थे,
वो फिर से सांस लेने लगते हैं,
जब बीते वक़्त के साए हम छू ही लेते हैं।
कुछ दर्द पुराने दोस्त से लगते हैं,
दिल की वीरान गलियों में बसते हैं,
चाहें लाख छुपाएं, लाख भुलाएं,
कभी ना कभी वो मिल ही जाते हैं।
पर हर पन्ना दर्द ही लिखता नहीं,
कुछ लफ़्ज़ मुस्कान भी देते हैं,
जहां बिखरी थी मायूसी कल तक,
वहीं नए सपने भी खिलते हैं।
तो आने दो हर शाम को चुपके से,
जैसे आंसू आकर भी ठहरते नहीं,
जिंदगी की किताब में कुछ पन्ने हैं दर्द के,
पर हर कहानी के अंजाम बिखरते नहीं।
©Naveen Dutt
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