संगीत कुमार

संगीत कुमार Lives in Jabalpur, Madhya Pradesh, India

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हे शिव शंकर ओढरदानी पार्वती पति हरे हरे गले में पहने सर्प माला गंगा जल जटा विराजे त्रिशूल धारी हर हर भोले हे शिव शंकर ओढरदानी पार्वती पति हरे हरे बसहा वाले भोले बाबा कृपालु जग के पालनकर्ता कष्ट रोग दोष को हरने वाले जटाधारी त्रि नेत्र वाले बाबा देवों के देव महादेव बाबा हे शिव शंकर भोले बाबा पार्वती पति हरे हरे सबके दुःख को सुनने वाले रोग दोष को हरने वाले तांडव नृत्य दिखाने वाले पर्वत पर विराजने वाले भांग धतुर को खाने वाले हे शिव शंकर भोले बाबा पार्वती पति हरे हरे ©संगीत कुमार

#कविता #mahashivratri  हे शिव शंकर ओढरदानी 
पार्वती पति हरे हरे
गले में पहने सर्प माला 
गंगा जल जटा विराजे 
त्रिशूल धारी हर हर भोले
हे शिव शंकर ओढरदानी 
पार्वती पति हरे हरे

बसहा वाले भोले बाबा 
कृपालु जग के पालनकर्ता 
कष्ट रोग दोष को हरने वाले 
जटाधारी त्रि नेत्र वाले बाबा
देवों के देव महादेव बाबा 
हे शिव शंकर भोले बाबा
पार्वती पति हरे हरे

सबके दुःख को सुनने वाले 
रोग दोष को हरने वाले 
तांडव नृत्य दिखाने वाले 
पर्वत पर विराजने वाले 
भांग धतुर को खाने वाले 
हे शिव शंकर भोले बाबा 
पार्वती पति हरे हरे

©संगीत कुमार

White असगर असगर हम रहै छी मन अहां खूब परै छी अमहर देखी ओमहर देखी मुदा हमरा किछु नै देखाई य अहांक मुस्कान याद परैय अहांक ओठक लाली नै देखा रह य हमरा अहांक झगड़ा खुब मन परै य अब त बुझु सबटा शांत भेल य घर लगैय बौक भेल य किछु नै आब सुना रहल य बुझु सबटा स्थिर भेल य अब नै हमरा मन लगै य अहां छलौ संग त घर झण झण करै छल जना बुझु फूलक सुगंध बहै छल सरिता रूपी नीर अंगना म अबै छल अब बुझु फुल मुरझा रहल य असगर असगर हम रहै छी मन अहां खूब परै छी ©संगीत कुमार

#कविता #sad_quotes  White असगर असगर हम रहै छी
मन अहां खूब परै छी
अमहर देखी ओमहर देखी
मुदा हमरा किछु नै देखाई य

अहांक मुस्कान याद परैय
अहांक ओठक लाली नै देखा रह य
हमरा अहांक झगड़ा खुब मन परै य
अब त बुझु सबटा शांत भेल य

घर लगैय बौक भेल य
किछु नै आब सुना रहल य
बुझु सबटा स्थिर भेल य
अब नै हमरा मन लगै य

अहां छलौ संग त घर झण झण करै छल
जना बुझु फूलक सुगंध बहै छल
सरिता रूपी नीर अंगना म अबै छल
अब बुझु फुल मुरझा रहल य

असगर असगर हम रहै छी 
मन अहां खूब परै छी

©संगीत कुमार

#sad_quotes

16 Love

नेह निहारे स्वप्न सजाये। सखी कब तुम आओगी।। अपनी बाते तुझे बताऊ। प्रेम रस कब लाओगी।। नेह निहारे स्वप्न सजाये। आँखों की पलको पे सजाऊ। मिलने अब कब आओगी।। बीती बाते फिर,कब हमे बताओगी। साथ फिर कब तू आओगी।। नेह निहारे स्वप्न सजाये। प्रेम रस उर में संजोये। गले कब लग जाओगी।। हाथ में हाथ रखे। प्रेम पथ पर कब आओगी।। नेह निहारे स्वप्न सजाये। नेह का दीप जलाये। तिमिर कब मिटाओगी।। प्रेम रस का अलख जगाने। फिर मिलने कब आओगी।। नेह निहारे स्वप्न सजाये। प्यार की ज्योति जलाये। तुझे हम दिल से पुकारे।। स्पर्श कब हो पाओगी। आओ फिर प्रेम का दीपक जलाये।। नेह निहारे स्वप्न सजाये। जीवन मे सूर्य की प्रभा बिखरे। पूनम की चमक सजाये।। अंधेरे में तू दीप जलाने। प्रेम जगाने जो आओगी।। नेह निहारे स्वप्न सजाये। ©संगीत कुमार

#कविता  नेह निहारे स्वप्न सजाये।
सखी कब तुम आओगी।। 
अपनी बाते तुझे बताऊ। 
प्रेम रस कब लाओगी।। 
नेह निहारे स्वप्न सजाये। 
आँखों की पलको पे सजाऊ। 
मिलने अब कब आओगी।। 
बीती बाते फिर,कब हमे बताओगी। 
साथ फिर कब तू आओगी।। 
नेह निहारे स्वप्न सजाये। 
प्रेम रस उर में संजोये। 
गले कब लग जाओगी।। 
हाथ में हाथ रखे। 
प्रेम पथ पर कब आओगी।। 
नेह निहारे स्वप्न सजाये। 
नेह का दीप जलाये। 
तिमिर कब मिटाओगी।। 
प्रेम रस का अलख जगाने। 
फिर मिलने कब आओगी।। 
नेह निहारे स्वप्न सजाये।

प्यार की ज्योति जलाये। 
तुझे हम दिल से पुकारे।।
स्पर्श कब हो पाओगी। 
आओ फिर प्रेम का दीपक जलाये।।
नेह निहारे स्वप्न सजाये। 

जीवन मे सूर्य की प्रभा बिखरे। 
पूनम की चमक सजाये।। 
अंधेरे में तू दीप जलाने। 
प्रेम जगाने जो आओगी।। 
नेह निहारे स्वप्न सजाये।

©संगीत कुमार

#Love

15 Love

आया बसंत रंग चढने लगा प्रेम का परवान आगे बढने लगा प्रेमिका प्रेमी संग चहकने लगी मधुर मधुर बयार बहने लगी सजधज राह निहारने लगी अधरों पे लाली दिखने लगा चेहरे पे मुस्कान खिलने लगा अलक पे गजरा महंकने लगा फूलों से घर आंगन सजानें लगा सुगंध की बयार बन हिया में बहने लगी बसंत तो मन में उतरने लगा चहुंओर प्रेम धुन गुंजने लगा आया बसंत रंग चढने लगा प्रेम का परवान चढने लगा ©संगीत कुमार

#कविता #lovebirds  आया बसंत रंग चढने लगा
प्रेम का परवान आगे बढने लगा
प्रेमिका प्रेमी संग चहकने लगी
मधुर मधुर बयार बहने लगी

सजधज राह निहारने लगी
अधरों पे लाली दिखने लगा
चेहरे पे मुस्कान खिलने लगा
अलक पे गजरा महंकने लगा

फूलों से घर आंगन सजानें लगा
सुगंध की बयार बन हिया में बहने लगी
बसंत तो मन में उतरने लगा
चहुंओर प्रेम धुन गुंजने लगा

आया बसंत रंग चढने लगा
प्रेम का परवान चढने लगा

©संगीत कुमार

#lovebirds

17 Love

ऐ खिल के मेरे मन की गुलाब तू बन जा। ख्वाबो की एहसास बन दिल में तू आ जा।। स्वप्न में तू रूप की मलिका बन आ जा। फूलों की गंध बन नींदों में समा जा।। ऐ खिल के मेरे मन की गुलाब तू बन जा। फूलों की कलियाँ बन गले से लग जा। सुगंध की बयार बन मन में बहा जा।। प्रेम की झड़ी चित्त से लगा जा। हीया से लग जा तन में समा जा।। ऐ खिल के मेरे मन की गुलाब तू बन जा। नयनों की चमक बन तू स्वप्नो में आ जा। स्नेह की लहर बन उर से लगा जा।। दिल के करीब आ तू बाँहों में आ जा। सरिता की नीर बन मेरे आँगन तू आ जा।। ऐ खिल के मेरे मन की गुलाब तू बन जा। प्रेमों की मंजरी बन मंजर तू खिला जा। नये नये कोपल बन ह्रदय से लग जा।। कोयल की कूक बन मन को तू भा जा। आ जा प्राणों में आ जा कलेजा में समा जा।। ऐ खिल के मेरे मन की गुलाब तू बन जा। ©संगीत कुमार

#कविता #roseday  ऐ खिल के मेरे मन की गुलाब तू बन जा।
ख्वाबो की एहसास बन दिल में तू आ जा।।
स्वप्न में तू रूप की मलिका बन आ जा।
फूलों की गंध बन नींदों में समा जा।।
ऐ खिल के मेरे मन की गुलाब तू बन जा।
फूलों की कलियाँ बन गले से लग जा।
सुगंध की बयार बन मन में बहा जा।।
प्रेम की झड़ी चित्त से लगा जा।
हीया से लग जा तन में समा जा।।
ऐ खिल के मेरे मन की गुलाब तू बन जा।
नयनों की चमक बन तू स्वप्नो में आ जा।
स्नेह की लहर बन उर से लगा जा।।
दिल के करीब आ तू बाँहों में आ जा।
सरिता की नीर बन मेरे आँगन तू आ जा।।
ऐ खिल के मेरे मन की गुलाब तू बन जा।
प्रेमों की मंजरी बन मंजर तू खिला जा।
नये नये कोपल बन ह्रदय से लग जा।।
कोयल की कूक बन मन को तू भा जा।
आ जा प्राणों में आ जा कलेजा में समा जा।।
ऐ खिल के मेरे मन की गुलाब तू बन जा।

©संगीत कुमार

#roseday

11 Love

White श्रृंगार में खूब दिखती हो। श्रृंगार की तू अवतारी हो।। मृगनयनी, सजनी लगती हो। कुसुम की तरह तू मन में खिलती हो।। श्रृंगार में खूब दिखती हो। श्रृंगार में क्या लगती हो। रूप तेरा जो गोरा है।। जोवन क्या तू महकाती हो। मन में क्या खूब भाती हो।। श्रृंगार में खूब दिखती हो। रूप तेरा जो गोरा है। चेहरा तेरा क्या चमकीला है।। ओंठों में लाली छायी है। कंठ की क्या मधुर वाणी है।। श्रृंगार में खूब दिखती हो। आँखों की काजल क्या चुभती है। माथे की बिंदी क्या खिलती है।। लम्बी -लम्बी जुल्फें क्या लहराती है। कानों की बाली क्या खूब दिखती है।। श्रृंगार में क्या खूब दिखती हो। हाथों की चूरी क्या खूब खनकती है। पैरों की पायल क्या छनकती है।। बालों का गजरा क्या खूब गमकता है। मन में मेरे झनकार सी उठती है।। श्रृंगार में खूब दिखती हो। घर को खूब सजाती हो। मन को क्या खूब भाती हो।। दिल में जो तुम बसती हो। अपना रंग बिखेरती हो।। श्रृंगार में खूब दिखती हो। तुझे क्या खूब निहारा हूँ। अपने बाँहों से लगाया हूँ।। तेरे प्यार में ही तो जीता हूँ। रग-रग में तू ही तो समायी हो।। श्रृंगार में क्या खूब दिखती हो। क्या दिव्य तेरा मुखरा है। नैनों में मेरे दिखती है।। प्राणों में तू रहती है। संगीत मन में समायी है।। श्रृंगार में खूब दिखती हो। ©संगीत कुमार

#कविता #love_shayari  White श्रृंगार में खूब दिखती हो। 
श्रृंगार की तू अवतारी हो।। 
मृगनयनी, सजनी लगती हो। 
कुसुम की तरह तू मन में खिलती हो।। 
श्रृंगार में खूब दिखती हो। 

श्रृंगार में क्या लगती हो। 
रूप तेरा जो गोरा है।। 
जोवन क्या तू महकाती हो। 
मन में  क्या खूब भाती  हो।।
श्रृंगार में खूब दिखती हो। 

 रूप तेरा जो गोरा है। 
 चेहरा तेरा क्या चमकीला है।।  
ओंठों में लाली छायी है। 
कंठ की क्या मधुर वाणी है।। 
श्रृंगार में खूब दिखती हो। 

आँखों की काजल क्या चुभती है। 
माथे की बिंदी क्या खिलती है।। 
लम्बी -लम्बी जुल्फें क्या लहराती है। 
कानों की बाली क्या खूब दिखती है।। 
श्रृंगार में क्या खूब दिखती हो। 

हाथों की चूरी क्या खूब खनकती है। 
पैरों की पायल क्या छनकती है।। 
बालों का गजरा क्या खूब गमकता है। 
मन में मेरे झनकार सी उठती है।। 
श्रृंगार में खूब दिखती हो। 

घर को खूब सजाती हो। 
मन को क्या खूब भाती हो।।
 दिल में जो तुम बसती हो।
अपना रंग बिखेरती हो।। 
श्रृंगार में खूब दिखती हो। 
तुझे क्या खूब निहारा हूँ। 
अपने बाँहों से लगाया हूँ।। 
तेरे प्यार में  ही तो जीता हूँ। 
रग-रग में   तू  ही तो समायी हो।। 
श्रृंगार में क्या खूब दिखती हो। 
क्या दिव्य तेरा मुखरा है। 
नैनों में  मेरे  दिखती है।। 
प्राणों में तू रहती है। 
संगीत  मन में समायी है।। 
श्रृंगार में खूब दिखती हो।

©संगीत कुमार

#love_shayari

14 Love

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