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Rahul
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कभी मैं अपने हाथों की लकीरों से नहीं उलझा, मुझे मालूम है, क़िस्मत का लिक्खा भी बदलता है... ©Rahul
12 Love
'राज' कैसे पहुँच गए 'गैरों' तक, 'मशवरे' तो हमने अपनों से किये थे... ©Rahul
9 Love
मुझे दुःख नहीं, मैं किसी का नहीं हुआ, दुःख है कि; मैंने सारा समय हर एक का होने की कोशिश की...! ©Rahul
18 Love
और अंत में... सब अपना प्रारंभ ढूंढते हैं! ©Rahul
10 Love
अचार की तरह मस्तिष्क में भी लगती है फफूँद, उसे भी दिखानी चाहिए विचार और संघर्ष की धूप...। ©Rahul
13 Love
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