Saket Ranjan Shukla

Saket Ranjan Shukla Lives in Lakhisarai, Bihar, India

ताक़त-ए-अल्फाज़ . Quotes|Poetry|Story . स्याहीकार|Published Author . रंग छोड़ती स्याही का सहारा लेता हूँ, अनकहे जज़्बात कह देता हूँ! IG:— my_pen_my_strength

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White यार है तू या पहेली है तू है आवारगी मेरी, तू ही है मेरा घर भी, तू ही बेबाकपन मेरा, तू ही है मेरा डर भी, मुश्किल तू, मयस्सर आराम भी है तुझमें, तू ही सुनहली धूप, तू ही छाँव-ए-शज़र भी, निराश रहूँ तुझसे मैं, रहे आस भी तुझसे ही, तू अंधियारी रात मेरी, तू ही नई सी सहर भी, ठौर-ठिकाना तू, मुझ राहगीर का फसाना तू, तू बिछड़ता हुआ मीत, तू ही है हमसफ़र भी, ऐ हमदम! तू यार है “साकेत" का या पहेली है, कि तू लगे जिंदगानी मुझे और तू ही ज़हर भी। IG :— @my_pen_my_strength ©Saket Ranjan Shukla

#स्याहीकार #my_pen_my_strength #poetryofinstagram #EmotionalJourney #कविता #poetryinmotion  White  यार है तू या पहेली है

तू है आवारगी मेरी, तू ही है मेरा घर भी,
तू ही बेबाकपन मेरा, तू ही है मेरा डर भी,

मुश्किल तू, मयस्सर आराम भी है तुझमें,
तू ही सुनहली धूप, तू ही छाँव-ए-शज़र भी,

निराश रहूँ तुझसे मैं, रहे आस भी तुझसे ही,
तू अंधियारी रात मेरी, तू ही नई सी सहर भी,

ठौर-ठिकाना तू, मुझ राहगीर का फसाना तू,
तू बिछड़ता हुआ मीत, तू ही है हमसफ़र भी,

ऐ हमदम! तू यार है “साकेत" का या पहेली है,
कि तू लगे जिंदगानी मुझे और तू ही ज़हर भी।

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©Saket Ranjan Shukla

यार है तू या पहेली है..! . ✍🏻Saket Ranjan Shukla All rights reserved© . Like≋Comment Follow @my_pen_my_strength .

18 Love

🔱महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं🔱 हृदय में अपार श्रद्धा लिए, कर जोड़े आपकी शरण में आए हैं, बेलपत्र एवं सेवन्तिकामालाओं का श्रृंगार आपके लिए लाए हैं, हे शिव शम्भो! दीजिए धैर्य इतना कि नैया लग जाए पार हमारी, रखिए कृपादृष्टि बनाए कि न कष्ट निकट आए, न ही कोई बीमारी, सर्वविदित महिमा आपकी, भक्तवत्सलता से भी जग अनजान नहीं, और हम हैं मूढ़ बालक, हे अंबिकानाथ, ब्रह्म का हमें कुछ ज्ञान नहीं, मान लिया अंतर्मन से गुरु आपको, आप ही अज्ञानता से हमें उबारिये, हे कृपनिधि! आपने ही दिया है जीवन हमें, अब आप ही इसे संवारिये, निवारिए हे भोले हमें कष्टों से, समस्याओं का हमारे समाधान दीजिए, कीजिए आराधना स्वीकार हे चन्द्रशेखर, शरण में अपने स्थान दीजिए, इस महाशिवरात्रि हे मृत्युंजय! अपने सभी भक्तों को अभयदान दीजिए, हे इंद्रदमनेश्वर देवाधिदेव महादेव, हमें अपनी भक्ती का वरदान दीजिए। IG :— @my_pen_my_strength ©Saket Ranjan Shukla

#हिंदीकविता #स्याहीकार #my_pen_my_strength #भक्ति #mahashivratri  🔱महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं🔱 

हृदय में अपार श्रद्धा लिए, कर जोड़े आपकी शरण में आए हैं,
बेलपत्र एवं सेवन्तिकामालाओं का श्रृंगार आपके लिए लाए हैं,
हे शिव शम्भो! दीजिए धैर्य इतना कि नैया लग जाए पार हमारी,
रखिए कृपादृष्टि बनाए कि न कष्ट निकट आए, न ही कोई बीमारी,

सर्वविदित महिमा आपकी, भक्तवत्सलता से भी जग अनजान नहीं,
और हम हैं मूढ़ बालक, हे अंबिकानाथ, ब्रह्म का हमें कुछ ज्ञान नहीं,
मान लिया अंतर्मन से गुरु आपको, आप ही अज्ञानता से हमें उबारिये,
हे कृपनिधि! आपने ही दिया है जीवन हमें, अब आप ही इसे संवारिये,

निवारिए हे भोले हमें कष्टों से, समस्याओं का हमारे समाधान दीजिए,
कीजिए आराधना स्वीकार हे चन्द्रशेखर, शरण में अपने स्थान दीजिए,
इस महाशिवरात्रि हे मृत्युंजय! अपने सभी भक्तों को अभयदान दीजिए,
हे इंद्रदमनेश्वर देवाधिदेव महादेव, हमें अपनी भक्ती का वरदान दीजिए।

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©Saket Ranjan Shukla

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं..! . ➺➺➺➺➺➺➺➺➺➺➺ ✍🏻Saket Ranjan Shukla All rights reserved© ➺➺➺➺➺➺➺➺➺➺➺➺➺ Like≋Comment Follow @my_pen_my_strength

16 Love

White हाँ हूँ मैं गलत लबों पर है ख़ामोशी भले मगर दिल में शोर ही शोर है, सबके निशाने पर मैं हूँ, सबकी अंगूली मेरी ही ओर है, ज़ख्मों से नवाजा गया मुझे मुस्कुराते रहने की शर्त पर, मुझे लूटकर भी कहा, मैं ही गलत, मन में मेरे ही चोर है.! IG :— @my_pen_my_strength ©Saket Ranjan Shukla

#स्याहीकार #my_pen_my_strength #शायरी #brokenhearted #hindishayari #lifelessons  White हाँ हूँ मैं गलत

लबों पर है ख़ामोशी भले मगर दिल में शोर ही शोर है,
सबके निशाने पर मैं हूँ, सबकी अंगूली मेरी ही ओर है,
ज़ख्मों से नवाजा गया मुझे मुस्कुराते रहने की शर्त पर,
मुझे लूटकर भी कहा, मैं ही गलत, मन में मेरे ही चोर है.!

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हाँ हूँ मैं गलत..! . ✍🏻Saket Ranjan Shukla All rights reserved© . Like≋Comment Follow @my_pen_my_strength .

15 Love

White वो बेगाना था कोई आख़िरी दफ़ा सोचा उसे और मुस्कुरा दिया उसे सोचकर, ख़त लिखा नाम उसके और छिपा दिया डायरी में मोड़कर, ढलक गए कुछ अश्क़ आँखों के कोरों से बिना इजाज़त के, क़ामिल हुईं दिल में चंद पुरानी यादें, दिली सतहें खरोंचकर, वो भी क्या दिन थे जब दिल उसका लगता था नहीं मेरे बगैर, आज वो जाते जाते चला गया, चला गया मुझे तन्हा छोड़कर, बाँधी थी सारी उम्मीदें उससे, कई ख़्वाब उसी के लिए बुने मैंने, उजाड़ गया हर ख़्वाबगाह वो, बिखेर गया सभी सपने तोड़कर, जिसे अपनी यादों पर भी मेरा हक़ नहीं है अब गवारा “साकेत", करता भी क्या आख़िर, क्या करता मैं उस बेगाने को रोककर। IG :— @my_pen_my_strength ©Saket Ranjan Shukla

#स्याहीकार #my_pen_my_strength #कविता #brokenhearted #hindishayari #lifelessons  White वो बेगाना था कोई

आख़िरी दफ़ा सोचा उसे और मुस्कुरा दिया उसे सोचकर,
ख़त लिखा नाम उसके और छिपा दिया डायरी में मोड़कर,

ढलक गए कुछ अश्क़ आँखों के कोरों से बिना इजाज़त के,
क़ामिल हुईं दिल में चंद पुरानी यादें, दिली सतहें खरोंचकर,

वो भी क्या दिन थे जब दिल उसका लगता था नहीं मेरे बगैर,
आज वो जाते जाते चला गया, चला गया मुझे तन्हा छोड़कर,

बाँधी थी सारी उम्मीदें उससे, कई ख़्वाब उसी के लिए बुने मैंने,
उजाड़ गया हर ख़्वाबगाह वो, बिखेर गया सभी सपने तोड़कर,

जिसे अपनी यादों पर भी मेरा हक़ नहीं है अब गवारा “साकेत",
करता भी क्या आख़िर, क्या करता मैं उस बेगाने को रोककर।

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©Saket Ranjan Shukla

वो बेगाना था कोई..! . ✍🏻Saket Ranjan Shukla All rights reserved© . Like≋Comment Follow @my_pen_my_strength .

15 Love

वसंत पंचमी, सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं अज्ञानता हर कर मेरी, मुझे तू आत्मज्ञान से भर दे, वर दे हे माँ शारदे, मुझ अबोध को सुविद्या का वर दे, दे दे स्थान निज बालक को अपनी करुणामयी गोद में, आशीष का कर कमल तू अपना, मस्तक पर मेरे धर दे, ये मृत्युलोक हे माता, माया ग्रसित अंधकारलीन नगरी है, हर ओर पलता है कपट, हर दूजे के कंधे पाखंड की गठरी है, क्रोध, लोभ और अहंकार आदि दुर्व्यवहारों से अंतर्मन त्रस्त है, ऐसे में तेरे मार्गदर्शन के सहारे ही हे माँ, बनती सबकी बिगड़ी है, परंतु कभी-कभी, कठिनाइयों से पस्त होकर लड़खड़ाने लगता हूँ स्वयं से हो संतप्त, स्वयं को कई कठिनाइयों में उलझाने लगता हूँ, करने जाता हूँ कुछ भला और जब होने सब कुछ ही गलत लगता है, तब हे माँ हंसवाहिनी! तुझे स्मरण करते ही सुमार्ग पर आने लगता हूँ, हर लेती है सारी चिंताएं और मुझमें साहस सहित विवेक भर देती है, अपने शरणार्थियों की हे माता तू सारे मानसिक तनाव भी हर लेती है, सुबुद्धि और आत्मज्ञान के संग सहजता और विनम्रता का भी वर दे माँ, जगव्याप्त है तेरी महिमा माँ कि तू निज बालकों को मनचाहा वर देती है, मंत्रोच्चारण का भान नहीं, जो कुछ आता है श्रद्धावश सम्मुख तेरे गाता हूँ, भजन कीर्तन का भी तो ज्ञान नहीं, मन ही मन तेरी अनुकंपा गुनगुनाता हूँ, करना क्षमा, हे विद्यादायिनी माँ, मैं भी मूढ़ अल्पज्ञानी बालक हूँ तुम्हारा ही, रखना बनाए कृपादृष्टि अपनी, हे माँ सरस्वती, करबद्ध शीष तुझे नवाता हूँ। IG:- @my_pen_my_strength ©Saket Ranjan Shukla

#हिंदीकविता #स्याहीकार #my_pen_my_strength #कविता #SaraswatiPuja #jaimasarswati  वसंत पंचमी, सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं 

अज्ञानता हर कर मेरी, मुझे तू आत्मज्ञान से भर दे,
वर दे हे माँ शारदे, मुझ अबोध को सुविद्या का वर दे,
दे दे स्थान निज बालक को अपनी करुणामयी गोद में,
आशीष का कर कमल तू अपना, मस्तक पर मेरे धर दे,

ये मृत्युलोक हे माता, माया ग्रसित अंधकारलीन नगरी है,
हर ओर पलता है कपट, हर दूजे के कंधे पाखंड की गठरी है,
क्रोध, लोभ और अहंकार आदि दुर्व्यवहारों से अंतर्मन त्रस्त है,
ऐसे में तेरे मार्गदर्शन के सहारे ही हे माँ, बनती सबकी बिगड़ी है,

परंतु कभी-कभी, कठिनाइयों से पस्त होकर लड़खड़ाने लगता हूँ
स्वयं से हो संतप्त, स्वयं को कई कठिनाइयों में उलझाने लगता हूँ,
करने जाता हूँ कुछ भला और जब होने सब कुछ ही गलत लगता है,
तब हे माँ हंसवाहिनी! तुझे स्मरण करते ही सुमार्ग पर आने लगता हूँ,

हर लेती है सारी चिंताएं और मुझमें साहस सहित विवेक भर देती है,
अपने शरणार्थियों की हे माता तू सारे मानसिक तनाव भी हर लेती है,
सुबुद्धि और आत्मज्ञान के संग सहजता और विनम्रता का भी वर दे माँ,
जगव्याप्त है तेरी महिमा माँ कि तू निज बालकों को मनचाहा वर देती है,

मंत्रोच्चारण का भान नहीं, जो कुछ आता है श्रद्धावश सम्मुख तेरे गाता हूँ,
भजन कीर्तन का भी तो ज्ञान नहीं, मन ही मन तेरी अनुकंपा गुनगुनाता हूँ,
करना क्षमा, हे विद्यादायिनी माँ, मैं भी मूढ़ अल्पज्ञानी बालक हूँ तुम्हारा ही,
रखना बनाए कृपादृष्टि अपनी, हे माँ सरस्वती, करबद्ध शीष तुझे नवाता हूँ।

IG:- @my_pen_my_strength

©Saket Ranjan Shukla

वसंत पंचमी, सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं..! . ✍🏻Saket Ranjan Shukla All rights reserved© . Like≋Comment Follow @my_pen_my_strength .

12 Love

76वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं स्वतंत्रता के बाद की अगणित अव्यवस्थाएँ सुलझाने को, भारतवर्ष के जन-जन को, समान स्वाधीनता दिलवाने को, परस्पर प्रेम, सौहार्द और सामंजस्यता का भाव जगाने को, खंड-खंड में बँटी हमारी मातृभूमि को पुनः सशक्त बनाने को, रियासती व मनसबदारी रीतियों से, निजात पाना जरूरी था, सांप्रदायिकता भुलाकर, सर्व-धर्म समभाव आना जरूरी था, शासक और प्रजाजन के बीच के भेद को मिटाना जरूरी था, सबका हो सम्मान समान, ऐसा गणराज्य बनाना जरूरी था, फिर भारतीय जनमानस की एक अनूठी आस प्रतिफलित हुई, सन् 1946 के त्रासदीग्रस्त हिंदुस्तान में, एक सुघटना घटित हुई, डॉ० राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक्षता में संविधान सभा जो गठित हुई, प्रारूप समिति अध्यक्ष डॉ० भीमराव अंबेडकरजी से सज्जित हुई, सरदार पटेल व 299 सदस्यों को, लोकतंत्र रचने का सम्मान मिला, भारत के भविष्य को गढ़ने और सँवारने, सँभालने का कमान मिला, दो साल ग्यारह महीनों एवं कई बैठकों का अंततः यह परिणाम मिला, स्वतंत्र भारतीयों को 26 जनवरी 1950 में संविधान का वरदान मिला, आइए हम सब लोकतांत्रिक भारत में गणतंत्रता का ये महापर्व मनाते हैं, राष्ट्रध्वज समक्ष राष्ट्रगान गाते हुए, जय हिंद, वंदे मातरम के नारे लगाते हैंl IG:— @my_pen_my_strength ©Saket Ranjan Shukla

#गणतंत्रदिवस #स्याहीकार #my_pen_my_strength #republicdayindia #कविता #26January2025  76वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 

स्वतंत्रता के बाद की अगणित अव्यवस्थाएँ सुलझाने को,
भारतवर्ष के जन-जन को, समान स्वाधीनता दिलवाने को,
परस्पर प्रेम, सौहार्द और सामंजस्यता का भाव जगाने को,
खंड-खंड में बँटी हमारी मातृभूमि को पुनः सशक्त बनाने को,

रियासती व मनसबदारी रीतियों से, निजात पाना जरूरी था,
सांप्रदायिकता भुलाकर, सर्व-धर्म समभाव आना जरूरी था,
शासक और प्रजाजन के बीच के भेद को मिटाना जरूरी था,
सबका हो सम्मान समान, ऐसा गणराज्य बनाना जरूरी था,

फिर भारतीय जनमानस की एक अनूठी आस प्रतिफलित हुई,
सन् 1946 के त्रासदीग्रस्त हिंदुस्तान में, एक सुघटना घटित हुई,
डॉ० राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक्षता में संविधान सभा जो गठित हुई,
प्रारूप समिति अध्यक्ष डॉ० भीमराव अंबेडकरजी से सज्जित हुई,

सरदार पटेल व 299 सदस्यों को, लोकतंत्र रचने का सम्मान मिला,
भारत के भविष्य को गढ़ने और सँवारने, सँभालने का कमान मिला,
दो साल ग्यारह महीनों एवं कई बैठकों का अंततः यह परिणाम मिला,
स्वतंत्र भारतीयों को 26 जनवरी 1950 में संविधान का वरदान मिला,

आइए हम सब लोकतांत्रिक भारत में गणतंत्रता का ये महापर्व मनाते हैं,
राष्ट्रध्वज समक्ष राष्ट्रगान गाते हुए, जय हिंद, वंदे मातरम के नारे लगाते हैंl

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©Saket Ranjan Shukla

76वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.! . ➺➺➺➺➺➺➺➺➺➺➺ ✍🏻Saket Ranjan Shukla All rights reserved© ➺➺➺➺➺➺➺➺➺➺➺➺➺ Like≋Comment Follow @my_pen_my_strength

16 Love

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