तुम तो ऐसे बदलते हों
जैसे बदलता हों मिजाज ए गिरगिट रंग अपना
ओर
क्या कहा था तुमने आखिर दफा मुझसे
कि तुमने तो कभी मेरी चाहत को समझा ही नहीं
अगर ना समझता चाहत तुम्हारी
तेरी मोहब्बत में ओर कितना रोएंगे
तुझ से जुदा हो कर हम कैसे जिएंगे
माना मैं बंदा ठीक नहीं था
पर जान तेरे जैसे मैं किसी के दिल खेलने वाला नहीं था
तेरी मोहब्बत अब रोया नहीं जाएगा
तुझ से जुदा हो कर अब जिया जाएगा
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