"ये इश्क मोहब्बत का सारा फितूर उतर गया है
देख श्रद्धा के दिल से आफताब दगा कर गया है
ऐसी मोहब्बत किस काम की भला सोचो
जहाँ खुद दिल भी अपने जमीर से मुकर गया है
किस भरोसे आखिर सब लुटा बैठती है लड़कियाँ
बेटी के खून से पिता के पाप का घड़ा भर गया है
लोग कहते हैं अब तरक्की कर रहा है ज़माना
लेकिन रफ्तार इतनी तेज़ है कि जज़्बात मर गया है
-राखी विश्वकर्मा
©Rakhi
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