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*अखबार नहीं है* ये मत कहो की तुमको हमसे प्यार नही | हिंदी शायरी

"*अखबार नहीं है* ये मत कहो की तुमको हमसे प्यार नही है है कौन यहाँ जो अपना तलबगार नहीं है अपना जादू सब के सर चढ़के बोलता है नहीं शख्स जिसके जहन चढ़ा खुमार नहीं है भोले के पुजारी आसानी से न मरेंगे आपका दिया जहर मियाँ असरदार नहीं है हम परशु के वंशज डरते नहीं शत्रुओं से हुई कुंद अभी तक फरसे की धार नहीं है परशुराम जी ने जन्म लिया अपने वंश में कायरों का समूह अपना परिवार नहीं है अपने ही लिबास में हम जीते हैं शान से किसी धन्नासेठ का हमपर उपकार नहीं है अपनी कठोर मेहनत पे भरोसा है हमें निज हाथ की लकीरों पे ऐतबार नहीं है बस अपने काम में मगन रहते हैं हमेंशा दुनियादारी से अपना सरोकार नहीं है हर एक पत्रिका में लेख छपते हैं हमारे हमारी खबर न हों जिसमें अखबार नहीं है स्वरचित रचना-राम जी तिवारी"राम" उन्नाव (उत्तर प्रदेश) ©Ramji Tiwari"

 *अखबार नहीं है*

ये मत कहो की तुमको हमसे प्यार नही है 
है कौन यहाँ जो अपना तलबगार नहीं है

अपना जादू सब के सर चढ़के बोलता है 
नहीं शख्स जिसके जहन चढ़ा खुमार नहीं है

भोले के पुजारी आसानी से न मरेंगे 
आपका दिया जहर मियाँ असरदार नहीं है

हम परशु के वंशज डरते नहीं शत्रुओं से  
 हुई कुंद अभी तक फरसे की धार नहीं है 

परशुराम जी ने जन्म लिया अपने वंश में 
कायरों का समूह अपना परिवार नहीं है

अपने ही लिबास में हम जीते हैं शान से 
किसी धन्नासेठ का हमपर उपकार नहीं है

अपनी कठोर मेहनत पे भरोसा है हमें 
निज हाथ की लकीरों पे ऐतबार नहीं है

बस अपने काम में मगन रहते हैं हमेंशा 
दुनियादारी से अपना सरोकार नहीं है 

हर एक पत्रिका में लेख छपते हैं हमारे 
हमारी खबर न हों जिसमें अखबार नहीं है

      स्वरचित रचना-राम जी तिवारी"राम"
                            उन्नाव (उत्तर प्रदेश)

©Ramji Tiwari

*अखबार नहीं है* ये मत कहो की तुमको हमसे प्यार नही है है कौन यहाँ जो अपना तलबगार नहीं है अपना जादू सब के सर चढ़के बोलता है नहीं शख्स जिसके जहन चढ़ा खुमार नहीं है भोले के पुजारी आसानी से न मरेंगे आपका दिया जहर मियाँ असरदार नहीं है हम परशु के वंशज डरते नहीं शत्रुओं से हुई कुंद अभी तक फरसे की धार नहीं है परशुराम जी ने जन्म लिया अपने वंश में कायरों का समूह अपना परिवार नहीं है अपने ही लिबास में हम जीते हैं शान से किसी धन्नासेठ का हमपर उपकार नहीं है अपनी कठोर मेहनत पे भरोसा है हमें निज हाथ की लकीरों पे ऐतबार नहीं है बस अपने काम में मगन रहते हैं हमेंशा दुनियादारी से अपना सरोकार नहीं है हर एक पत्रिका में लेख छपते हैं हमारे हमारी खबर न हों जिसमें अखबार नहीं है स्वरचित रचना-राम जी तिवारी"राम" उन्नाव (उत्तर प्रदेश) ©Ramji Tiwari

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#सजल

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कहती है दुनिया, प्यार और जंग में सब जायज़ है।
तू कबूल ले मुझे, यही खुदा से फरमाईश है।

मेरे मन में बैठी तू, संगीत की धुन कोई,
गाती कोयल, नया अनुराग सा कोई।
तुझसे रिश्ता है मेरा, अजीज़ कोई,
जैसे हवाओं का पत्तों से वास्ता कोई,
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तुझे न देखूं, ऐसा होगा नहीं,
तुझे देखना मेरी फितरत में है।
चुपके से देख लूं एक बार तुझे, थोड़ा अजीब ही सही,
तेरे पैरों की आहट से, मुझे प्यारी सी घबराहट है कोई।

देख ले एक बार मुझे, इसी में है राहत मेरी,
  तू आए न आए, तेरे दीदार को, 
मेरी तरसती आँखों का इंतजार ही सही।

मेरी इबादत जरूर, एक दिन रंग लाएगी,
जब तेरी ये चंचल आँखें मुझ पर रुक जाएंगी।

तुझसे है रिश्ता मेरा, अजीज़ कोई,
तुझे न देखूं, ऐसा होगा नहीं।

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