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मैं हू रावण ©virat sumit

#Bhakti  मैं हू रावण

©virat sumit

मैं हू रावण Aaj Ka Panchang

13 Love

White ये जो दोहरा चरित्र है बड़ा ही विचित्र है ना ही किसी का शत्रु है ना ही किसी का मित्र है क्या उसका अस्तित्व है, क्या उसका अस्तित्व है कहीं पे हां, कहीं पे ना कहीं पे मुस्कुरा  दिये स्पष्ट कुछ ना कह सके बातें सभी घुमा दिये जो कुछ यहां पर सत्य है ना बात उसकी कीजिये चर्चा ही किस बात की जब काम वो ना कीजिये राम का मुखौटा रावण का चरित्र है मचं पर लड़ते हैं सब घर में सभी ही मित्र हैं जो हमसे आकर मिल गये पापी सभी पवित्र हैं चांदी है चंद लोगों की जनता अब भी, अपवित्र है पहले वाली चलचित्र में नायक बहूत सही था वो पर आज के चलचित्र में खलनायक का चरित्र है ये जो दोहरा चरित्र है बड़ा ही विचित्र है ©मुखौटा A HIDDEN FEELINGS * अंकूर *

#Sad_Status  White ये जो दोहरा चरित्र है बड़ा ही विचित्र है
ना ही किसी का शत्रु है ना ही किसी का मित्र है
क्या उसका अस्तित्व है, क्या उसका अस्तित्व है

कहीं पे हां, कहीं पे ना
कहीं पे मुस्कुरा  दिये स्पष्ट कुछ ना कह सके
बातें सभी घुमा दिये

जो कुछ यहां पर सत्य है ना बात उसकी कीजिये
चर्चा ही किस बात की जब काम वो ना कीजिये

राम का मुखौटा रावण का चरित्र है
मचं पर लड़ते हैं सब घर में सभी ही मित्र हैं

जो हमसे आकर मिल गये पापी सभी पवित्र हैं
चांदी है चंद लोगों की जनता अब भी, अपवित्र है

पहले वाली चलचित्र में नायक बहूत सही था वो
पर आज के चलचित्र में खलनायक का चरित्र है
ये जो दोहरा चरित्र है
बड़ा ही विचित्र है

©मुखौटा A HIDDEN FEELINGS * अंकूर *

#Sad_Status heart touching life quotes in hindi ये जो दोहरा चरित्र है बड़ा ही विचित्र है ना ही किसी का शत्रु है ना ही किसी का मित्र है क्या

12 Love

• हजार हजार शुक्र उस जोतीस्वरुप नीरंजन नीराकारका है किं जिसने जमीन व आसमानको बनाया और तमाम सृष्टीको पैदाकीया परंन्तु उस की कारीगरीका भेद किसी पर जाहीर नहीहुआ कि क्या भेदहै फिर मेंरी जबानसे इश्वर परमात्माकी तारीफ अदा नहीहोसक्ती और दूसरा मजमुन बतौर समुद्र केहै सो कलमसे लिखा जाताह कि जो२करतब मैने इन सौदागर महाजनान-के देखे वोह अजब तरहके नजर आये जिससे मुझ गरीब साध अनुपदासको तमांम जहांनके हिंन्दु मुसलमान और साध संत और पण्डित फकीर और मुल्कों मुल्कोंके राजा महाराजा और सातों आठों और सब-विलायतोंके बादशाह और दीगर अंग्रेज वगैराकी खिदमतमें हाथ जोङकर अरज;करना लाजिम आया कि जिसको जादूचाला और राक्षस विधा और काफिर विधा और इन्द्रजाल कहतेहैं वोह एक किसमका पापहै कि जिस्तरहसे रावणने चलायाथा और मेह और मौतको कबजेमें करलीथी पापके सबबसे याने होम करा२के बुद्धी भी भ्रष्ट करदीथी इन्द्रजालके पापसे और काल वगैरा, पङा२करके लक्षमी अपने काबूमें करके लंकामें लेगयाथा और उसीतरहसे- हिरनाकश राजानेभी चलायाथा और उसीतरहसे कंन्स राजानेभी चलायाथा और उसीतरहसे कारुन बादशाहनेभी चलायाथा और रावण हिरनाकश कंस कारुन वगैराकी तरहसे बल राजाके बादसे इन सौदागर महाजनाननेभी-राक्षस विधाका पाप चलायाहै सोइन बनियोंनेभी मेहको और मोतको सहारे करलीहै और बुद्धी भ्रष्ट करदीहै ..... • सोइस.बातका.इन्साफकीया चाहीये क्युंकि इन्साफके-करनेसे,खुद,मालुम,होजावेगा- ... ( २२९ ) साध अनुपदास- लीखी- कीताब - [ जगतहीतकारनी ] ( २७४ ) पढ़ें छावणी ऐरनपुरा, शिवगंज - ३०७०२७ (राज.) संपर्क :- 02976-273024 , 8905653801 www.jagathitkarnioriginal.org ©JAGAT HITKARNI 274

#विचार  •  हजार हजार शुक्र उस जोतीस्वरुप नीरंजन नीराकारका है किं जिसने जमीन व आसमानको बनाया और तमाम सृष्टीको पैदाकीया परंन्तु उस की कारीगरीका भेद किसी पर जाहीर नहीहुआ कि क्या भेदहै फिर मेंरी जबानसे इश्वर परमात्माकी  तारीफ अदा नहीहोसक्ती और दूसरा मजमुन बतौर समुद्र केहै सो कलमसे लिखा जाताह कि जो२करतब मैने इन सौदागर महाजनान-के देखे वोह अजब तरहके नजर आये जिससे मुझ गरीब साध अनुपदासको तमांम जहांनके हिंन्दु मुसलमान और साध संत और पण्डित फकीर और मुल्कों मुल्कोंके राजा महाराजा और सातों  आठों और सब-विलायतोंके बादशाह और दीगर अंग्रेज वगैराकी खिदमतमें हाथ जोङकर अरज;करना लाजिम आया कि जिसको जादूचाला और राक्षस विधा और काफिर विधा और इन्द्रजाल कहतेहैं वोह एक किसमका पापहै कि जिस्तरहसे रावणने चलायाथा और मेह और मौतको कबजेमें करलीथी पापके सबबसे याने होम करा२के बुद्धी भी भ्रष्ट करदीथी इन्द्रजालके पापसे और काल वगैरा, पङा२करके लक्षमी अपने काबूमें करके लंकामें लेगयाथा और उसीतरहसे- हिरनाकश राजानेभी चलायाथा और उसीतरहसे कंन्स राजानेभी चलायाथा और उसीतरहसे कारुन बादशाहनेभी चलायाथा और रावण हिरनाकश कंस कारुन वगैराकी तरहसे बल राजाके बादसे इन सौदागर महाजनाननेभी-राक्षस विधाका पाप चलायाहै सोइन बनियोंनेभी मेहको और मोतको सहारे करलीहै और बुद्धी भ्रष्ट करदीहै  .....

•  सोइस.बातका.इन्साफकीया चाहीये क्युंकि इन्साफके-करनेसे,खुद,मालुम,होजावेगा- ... ( २२९ )
साध अनुपदास-  लीखी- 
कीताब - [ जगतहीतकारनी ] ( २७४ ) पढ़ें
छावणी ऐरनपुरा, शिवगंज - ३०७०२७  (राज.)
संपर्क :- 02976-273024 , 8905653801
www.jagathitkarnioriginal.org

©JAGAT HITKARNI 274

• हजार हजार शुक्र उस जोतीस्वरुप नीरंजन नीराकारका है किं जिसने जमीन व आसमानको बनाया और तमाम सृष्टीको पैदाकीया परंन्तु उस की कारीगरीका भेद कि

11 Love

White जय परमेश्वर रांवणकी तरहसे-इनबनीयोंने-जादुचलायाहे सो हकीकतमें-असल-पापःइन-बनीयोंकाहे-अगर बनीयोंके जादुकी;खबर-संसारके-लोगोंको पङजाये तो संसारकेलोग बनीयोंके-घरमेंही-जीवङोंको;मारकेडालदेवें परंन्तु संसारके,लोगोंको,इनके,जालकी,मालुमनहीहे वोहतो देवकलाके;भरोसे.भुलेहुयेहें.क्युंकि रावणवगैरा देवतोंकेउपर जीवङोंको;मरवाताथा;परंन्तु जबके रावणके पापकी-खबरपङी-जब-संसारके-लोगोंने रावण हिरनाकश;वगैराकी.ओदही.नीकालदीथी फीर रावणकी;तरहसे इन बनीयोंकाभी.जाल.चलरहाहे सोअब रावणकीतरहसे इन,बनीयोंके,जालकी,मुझको खबरपङीहे जीसतरहसे;कि पहीले.पापके.चलानेवालोंको सजादीगइहे उसीतरहसे इन.बनीयोंकाभी.पाप;छोडाओ,तो संसारका भलाहोवे-..... ( २६४ ) अज तसनीफ साध अनुपदास लीखी- कीताब - [ जगतहीतकारनी ] ( २७४ ) तमांम पढ़कर बंन्दोबस्त करो छावणी ऐरनपुरामें, शिवगंज - ३०७०२७ (राज.) ता १७ अप्रेल संन १९०९ झा बैसाष बुदी १२ सं॥ १९६५ M. No. :- 8905653801 www.jagathitkarnioriginal.org ©LalitPurohit

#विचार #sad_quotes  White जय परमेश्वर 
रांवणकी तरहसे-इनबनीयोंने-जादुचलायाहे सो हकीकतमें-असल-पापःइन-बनीयोंकाहे-अगर बनीयोंके जादुकी;खबर-संसारके-लोगोंको पङजाये तो संसारकेलोग बनीयोंके-घरमेंही-जीवङोंको;मारकेडालदेवें परंन्तु संसारके,लोगोंको,इनके,जालकी,मालुमनहीहे वोहतो देवकलाके;भरोसे.भुलेहुयेहें.क्युंकि रावणवगैरा देवतोंकेउपर जीवङोंको;मरवाताथा;परंन्तु जबके रावणके पापकी-खबरपङी-जब-संसारके-लोगोंने रावण हिरनाकश;वगैराकी.ओदही.नीकालदीथी फीर रावणकी;तरहसे इन बनीयोंकाभी.जाल.चलरहाहे सोअब रावणकीतरहसे इन,बनीयोंके,जालकी,मुझको खबरपङीहे जीसतरहसे;कि पहीले.पापके.चलानेवालोंको सजादीगइहे उसीतरहसे इन.बनीयोंकाभी.पाप;छोडाओ,तो संसारका भलाहोवे-..... ( २६४ )

अज तसनीफ साध अनुपदास लीखी- 
कीताब - [ जगतहीतकारनी ] ( २७४ ) तमांम पढ़कर बंन्दोबस्त करो 
छावणी ऐरनपुरामें, शिवगंज - ३०७०२७  (राज.)
ता १७ अप्रेल संन १९०९ झा बैसाष बुदी १२ सं॥ १९६५
M. No. :- 8905653801
www.jagathitkarnioriginal.org

©LalitPurohit

#sad_quotes जय परमेश्वर रांवणकी तरहसे-इनबनीयोंने-जादुचलायाहे सो हकीकतमें-असल-पापःइन-बनीयोंकाहे-अगर बनीयोंके जादुकी;खबर-संसारके-लोगोंको पङजा

18 Love

मैं हू रावण ©virat sumit

#Bhakti  मैं हू रावण

©virat sumit

मैं हू रावण Aaj Ka Panchang

13 Love

White ये जो दोहरा चरित्र है बड़ा ही विचित्र है ना ही किसी का शत्रु है ना ही किसी का मित्र है क्या उसका अस्तित्व है, क्या उसका अस्तित्व है कहीं पे हां, कहीं पे ना कहीं पे मुस्कुरा  दिये स्पष्ट कुछ ना कह सके बातें सभी घुमा दिये जो कुछ यहां पर सत्य है ना बात उसकी कीजिये चर्चा ही किस बात की जब काम वो ना कीजिये राम का मुखौटा रावण का चरित्र है मचं पर लड़ते हैं सब घर में सभी ही मित्र हैं जो हमसे आकर मिल गये पापी सभी पवित्र हैं चांदी है चंद लोगों की जनता अब भी, अपवित्र है पहले वाली चलचित्र में नायक बहूत सही था वो पर आज के चलचित्र में खलनायक का चरित्र है ये जो दोहरा चरित्र है बड़ा ही विचित्र है ©मुखौटा A HIDDEN FEELINGS * अंकूर *

#Sad_Status  White ये जो दोहरा चरित्र है बड़ा ही विचित्र है
ना ही किसी का शत्रु है ना ही किसी का मित्र है
क्या उसका अस्तित्व है, क्या उसका अस्तित्व है

कहीं पे हां, कहीं पे ना
कहीं पे मुस्कुरा  दिये स्पष्ट कुछ ना कह सके
बातें सभी घुमा दिये

जो कुछ यहां पर सत्य है ना बात उसकी कीजिये
चर्चा ही किस बात की जब काम वो ना कीजिये

राम का मुखौटा रावण का चरित्र है
मचं पर लड़ते हैं सब घर में सभी ही मित्र हैं

जो हमसे आकर मिल गये पापी सभी पवित्र हैं
चांदी है चंद लोगों की जनता अब भी, अपवित्र है

पहले वाली चलचित्र में नायक बहूत सही था वो
पर आज के चलचित्र में खलनायक का चरित्र है
ये जो दोहरा चरित्र है
बड़ा ही विचित्र है

©मुखौटा A HIDDEN FEELINGS * अंकूर *

#Sad_Status heart touching life quotes in hindi ये जो दोहरा चरित्र है बड़ा ही विचित्र है ना ही किसी का शत्रु है ना ही किसी का मित्र है क्या

12 Love

• हजार हजार शुक्र उस जोतीस्वरुप नीरंजन नीराकारका है किं जिसने जमीन व आसमानको बनाया और तमाम सृष्टीको पैदाकीया परंन्तु उस की कारीगरीका भेद किसी पर जाहीर नहीहुआ कि क्या भेदहै फिर मेंरी जबानसे इश्वर परमात्माकी तारीफ अदा नहीहोसक्ती और दूसरा मजमुन बतौर समुद्र केहै सो कलमसे लिखा जाताह कि जो२करतब मैने इन सौदागर महाजनान-के देखे वोह अजब तरहके नजर आये जिससे मुझ गरीब साध अनुपदासको तमांम जहांनके हिंन्दु मुसलमान और साध संत और पण्डित फकीर और मुल्कों मुल्कोंके राजा महाराजा और सातों आठों और सब-विलायतोंके बादशाह और दीगर अंग्रेज वगैराकी खिदमतमें हाथ जोङकर अरज;करना लाजिम आया कि जिसको जादूचाला और राक्षस विधा और काफिर विधा और इन्द्रजाल कहतेहैं वोह एक किसमका पापहै कि जिस्तरहसे रावणने चलायाथा और मेह और मौतको कबजेमें करलीथी पापके सबबसे याने होम करा२के बुद्धी भी भ्रष्ट करदीथी इन्द्रजालके पापसे और काल वगैरा, पङा२करके लक्षमी अपने काबूमें करके लंकामें लेगयाथा और उसीतरहसे- हिरनाकश राजानेभी चलायाथा और उसीतरहसे कंन्स राजानेभी चलायाथा और उसीतरहसे कारुन बादशाहनेभी चलायाथा और रावण हिरनाकश कंस कारुन वगैराकी तरहसे बल राजाके बादसे इन सौदागर महाजनाननेभी-राक्षस विधाका पाप चलायाहै सोइन बनियोंनेभी मेहको और मोतको सहारे करलीहै और बुद्धी भ्रष्ट करदीहै ..... • सोइस.बातका.इन्साफकीया चाहीये क्युंकि इन्साफके-करनेसे,खुद,मालुम,होजावेगा- ... ( २२९ ) साध अनुपदास- लीखी- कीताब - [ जगतहीतकारनी ] ( २७४ ) पढ़ें छावणी ऐरनपुरा, शिवगंज - ३०७०२७ (राज.) संपर्क :- 02976-273024 , 8905653801 www.jagathitkarnioriginal.org ©JAGAT HITKARNI 274

#विचार  •  हजार हजार शुक्र उस जोतीस्वरुप नीरंजन नीराकारका है किं जिसने जमीन व आसमानको बनाया और तमाम सृष्टीको पैदाकीया परंन्तु उस की कारीगरीका भेद किसी पर जाहीर नहीहुआ कि क्या भेदहै फिर मेंरी जबानसे इश्वर परमात्माकी  तारीफ अदा नहीहोसक्ती और दूसरा मजमुन बतौर समुद्र केहै सो कलमसे लिखा जाताह कि जो२करतब मैने इन सौदागर महाजनान-के देखे वोह अजब तरहके नजर आये जिससे मुझ गरीब साध अनुपदासको तमांम जहांनके हिंन्दु मुसलमान और साध संत और पण्डित फकीर और मुल्कों मुल्कोंके राजा महाराजा और सातों  आठों और सब-विलायतोंके बादशाह और दीगर अंग्रेज वगैराकी खिदमतमें हाथ जोङकर अरज;करना लाजिम आया कि जिसको जादूचाला और राक्षस विधा और काफिर विधा और इन्द्रजाल कहतेहैं वोह एक किसमका पापहै कि जिस्तरहसे रावणने चलायाथा और मेह और मौतको कबजेमें करलीथी पापके सबबसे याने होम करा२के बुद्धी भी भ्रष्ट करदीथी इन्द्रजालके पापसे और काल वगैरा, पङा२करके लक्षमी अपने काबूमें करके लंकामें लेगयाथा और उसीतरहसे- हिरनाकश राजानेभी चलायाथा और उसीतरहसे कंन्स राजानेभी चलायाथा और उसीतरहसे कारुन बादशाहनेभी चलायाथा और रावण हिरनाकश कंस कारुन वगैराकी तरहसे बल राजाके बादसे इन सौदागर महाजनाननेभी-राक्षस विधाका पाप चलायाहै सोइन बनियोंनेभी मेहको और मोतको सहारे करलीहै और बुद्धी भ्रष्ट करदीहै  .....

•  सोइस.बातका.इन्साफकीया चाहीये क्युंकि इन्साफके-करनेसे,खुद,मालुम,होजावेगा- ... ( २२९ )
साध अनुपदास-  लीखी- 
कीताब - [ जगतहीतकारनी ] ( २७४ ) पढ़ें
छावणी ऐरनपुरा, शिवगंज - ३०७०२७  (राज.)
संपर्क :- 02976-273024 , 8905653801
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• हजार हजार शुक्र उस जोतीस्वरुप नीरंजन नीराकारका है किं जिसने जमीन व आसमानको बनाया और तमाम सृष्टीको पैदाकीया परंन्तु उस की कारीगरीका भेद कि

11 Love

White जय परमेश्वर रांवणकी तरहसे-इनबनीयोंने-जादुचलायाहे सो हकीकतमें-असल-पापःइन-बनीयोंकाहे-अगर बनीयोंके जादुकी;खबर-संसारके-लोगोंको पङजाये तो संसारकेलोग बनीयोंके-घरमेंही-जीवङोंको;मारकेडालदेवें परंन्तु संसारके,लोगोंको,इनके,जालकी,मालुमनहीहे वोहतो देवकलाके;भरोसे.भुलेहुयेहें.क्युंकि रावणवगैरा देवतोंकेउपर जीवङोंको;मरवाताथा;परंन्तु जबके रावणके पापकी-खबरपङी-जब-संसारके-लोगोंने रावण हिरनाकश;वगैराकी.ओदही.नीकालदीथी फीर रावणकी;तरहसे इन बनीयोंकाभी.जाल.चलरहाहे सोअब रावणकीतरहसे इन,बनीयोंके,जालकी,मुझको खबरपङीहे जीसतरहसे;कि पहीले.पापके.चलानेवालोंको सजादीगइहे उसीतरहसे इन.बनीयोंकाभी.पाप;छोडाओ,तो संसारका भलाहोवे-..... ( २६४ ) अज तसनीफ साध अनुपदास लीखी- कीताब - [ जगतहीतकारनी ] ( २७४ ) तमांम पढ़कर बंन्दोबस्त करो छावणी ऐरनपुरामें, शिवगंज - ३०७०२७ (राज.) ता १७ अप्रेल संन १९०९ झा बैसाष बुदी १२ सं॥ १९६५ M. No. :- 8905653801 www.jagathitkarnioriginal.org ©LalitPurohit

#विचार #sad_quotes  White जय परमेश्वर 
रांवणकी तरहसे-इनबनीयोंने-जादुचलायाहे सो हकीकतमें-असल-पापःइन-बनीयोंकाहे-अगर बनीयोंके जादुकी;खबर-संसारके-लोगोंको पङजाये तो संसारकेलोग बनीयोंके-घरमेंही-जीवङोंको;मारकेडालदेवें परंन्तु संसारके,लोगोंको,इनके,जालकी,मालुमनहीहे वोहतो देवकलाके;भरोसे.भुलेहुयेहें.क्युंकि रावणवगैरा देवतोंकेउपर जीवङोंको;मरवाताथा;परंन्तु जबके रावणके पापकी-खबरपङी-जब-संसारके-लोगोंने रावण हिरनाकश;वगैराकी.ओदही.नीकालदीथी फीर रावणकी;तरहसे इन बनीयोंकाभी.जाल.चलरहाहे सोअब रावणकीतरहसे इन,बनीयोंके,जालकी,मुझको खबरपङीहे जीसतरहसे;कि पहीले.पापके.चलानेवालोंको सजादीगइहे उसीतरहसे इन.बनीयोंकाभी.पाप;छोडाओ,तो संसारका भलाहोवे-..... ( २६४ )

अज तसनीफ साध अनुपदास लीखी- 
कीताब - [ जगतहीतकारनी ] ( २७४ ) तमांम पढ़कर बंन्दोबस्त करो 
छावणी ऐरनपुरामें, शिवगंज - ३०७०२७  (राज.)
ता १७ अप्रेल संन १९०९ झा बैसाष बुदी १२ सं॥ १९६५
M. No. :- 8905653801
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#sad_quotes जय परमेश्वर रांवणकी तरहसे-इनबनीयोंने-जादुचलायाहे सो हकीकतमें-असल-पापःइन-बनीयोंकाहे-अगर बनीयोंके जादुकी;खबर-संसारके-लोगोंको पङजा

18 Love

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