White सोहनी और माहीवाल
सोहनी थी चांदनी रातों सी,
उसकी आँखों में काजल की बातों सी।
दरिया किनारे जब खड़ी वो जाती,
हर लहर उसके कदमों को सजाती।
माहीवाल, वो प्रेम दी रीत था,
दिल का सौदा, वो अमर गीत था।
चरवाहा सादा, पर दिल का शहज़ादा,
सोहनी के लिए था उसका वादा।
दरिया ने देखा जब प्रेम का खेल,
सोहनी तैरती, घड़ा था मेल।
माही ने दिल से उसे पुकारा,
"सोहनी, बिना तेरे दुनिया है सूनी सारा।"
पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था,
दो प्रेमियों का प्रेम अधूरा था।
लहरों ने घड़ा तोड़ डाला,
सोहनी को अपने माही से दूर कर डाला।
पर कहते हैं, वो अमर प्रेम है,
दरिया की हर लहर में उसका स्पर्श है।
सोहनी-माहीवाल की यह दास्तान,
सिखाती है, सच्चा प्रेम अमर वरदान।
©aditi the writer
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