White हम भी वही, तुम भी वही,
हम दोनों में अंतर क्या है?
मैं तुममें हूँ, तुम मुझमें हो,
फिर मैं प्रीत करूँ किससे?
इस जग में तुम, इस जग में मैं।
कण कण में तुम, कण कण में मैं,
मैं और तुम में अंतर बस
स्वयं का स्वयं से आलिंगन है।
जीवन के पथरीले पथ पर
हम साथ हमेशा रहते है,
संग धूप में चलना सीखे है,
बन शजर शीतलता देते है।
अब और क्या चाहूं तुझसे,
मय और नशा, तुम और मैं,
हम दोनों में अंतर क्या है?
अब मैं प्रीत करूँ किससे?
written by:-
संजय सक्सेना
प्रयागराज।
©Sanjai Saxena
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