Sanjai Saxena

Sanjai Saxena Lives in Allahabad, Uttar Pradesh, India

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White हम जब भी होते कष्ट में करते ईश्वर याद, राजा से उम्मीद क्यों, जब हो न भगवन पास। संजय सक्सेना, प्रयागराज। ©Sanjai Saxena

#कविता #Shiva  White हम जब भी होते कष्ट में 
करते ईश्वर याद,
राजा से उम्मीद क्यों,
जब हो न भगवन पास।

संजय सक्सेना,
प्रयागराज।

©Sanjai Saxena

#Shiva

8 Love

White दौर-ए-गुफ्तगू अब होने लगे, लेखक भी गुटों में बटने लगे। संजय सक्सेना, प्रयागराज। ©Sanjai Saxena

#कविता #hindi_diwas  White दौर-ए-गुफ्तगू अब होने लगे,
लेखक भी गुटों में बटने लगे।

संजय सक्सेना,
प्रयागराज।

©Sanjai Saxena

#hindi_diwas

14 Love

Unsplash दुनिया मे लोग वास्तव में बदलते नही है, कुछ अपनो को खुद से दूर कर देते है। गिला उनसे नही, उनकी हरकतों से है, वह तो मजबूर है, हम भी तो मजबूर है। written by:- संजय सक्सेना, प्रयागराज। ©Sanjai Saxena

#कविता #library  Unsplash दुनिया मे लोग वास्तव में बदलते नही है,
कुछ अपनो को खुद से दूर कर देते है।

गिला उनसे नही, उनकी हरकतों से है,
वह तो मजबूर है, हम भी तो मजबूर है।

written by:-
संजय सक्सेना,
प्रयागराज।

©Sanjai Saxena

#library

12 Love

White हुस्न कितना ही हसीन क्यो न हो, इश्क ओ आशिक की चाह तो रहती है, इंसान कितनी भी गुरबत में क्यो न हो, मोहब्बत-ए-जगत की आस तो रहती है। written by:- संजय सक्सेना, प्रयागराज। ©Sanjai Saxena

#कविता #Sad_Status  White हुस्न कितना ही हसीन क्यो न हो,
इश्क ओ आशिक की चाह तो रहती है,
इंसान कितनी भी गुरबत में क्यो न हो,
मोहब्बत-ए-जगत की आस तो रहती है।

written by:-
संजय सक्सेना,
प्रयागराज।

©Sanjai Saxena

#Sad_Status

13 Love

White हमने तो तुमसे बस दोस्ती की है, जाने क्यों तुम मोहब्बत कर बैठे, ऐसा कहा था, महबूबा ने मेरी, ढलकते आंसुओ को रोककर। written by:- संजय सक्सेना, प्रयागराज। ©Sanjai Saxena

#कविता #love_qoutes  White हमने तो तुमसे बस दोस्ती की है,
जाने क्यों तुम मोहब्बत कर बैठे,
ऐसा कहा था, महबूबा ने मेरी,
ढलकते आंसुओ को रोककर।

written by:-
संजय सक्सेना,
प्रयागराज।

©Sanjai Saxena

#love_qoutes

14 Love

White हम भी वही, तुम भी वही, हम दोनों में अंतर क्या है? मैं तुममें हूँ, तुम मुझमें हो, फिर मैं प्रीत करूँ किससे? इस जग में तुम, इस जग में मैं। कण कण में तुम, कण कण में मैं, मैं और तुम में अंतर बस स्वयं का स्वयं से आलिंगन है। जीवन के पथरीले पथ पर हम साथ हमेशा रहते है, संग धूप में चलना सीखे है, बन शजर शीतलता देते है। अब और क्या चाहूं तुझसे, मय और नशा, तुम और मैं, हम दोनों में अंतर क्या है? अब मैं प्रीत करूँ किससे? written by:- संजय सक्सेना प्रयागराज। ©Sanjai Saxena

#कविता #sad_shayari  White हम भी वही, तुम भी वही,
हम दोनों में अंतर क्या है?
मैं तुममें हूँ, तुम मुझमें हो,
फिर मैं प्रीत करूँ किससे?

इस जग में तुम, इस जग में मैं।
कण कण में तुम, कण कण में मैं,
मैं और तुम में अंतर बस 
स्वयं का स्वयं से आलिंगन है।

जीवन के पथरीले पथ पर 
हम साथ हमेशा रहते है,
संग धूप में चलना सीखे है,
बन शजर शीतलता देते है।

अब और क्या चाहूं तुझसे,
मय और नशा, तुम और मैं,
हम दोनों में अंतर क्या है?
अब मैं प्रीत करूँ किससे?

written by:-
संजय सक्सेना
प्रयागराज।

©Sanjai Saxena

#sad_shayari

16 Love

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