White ये जो कहते हैं कि किसी के छोड़ जाने से
कोई नही मरता,
तो मैं उनसे कहना चाहता हूँ कि,
मर जाना सिर्फ जान निकल जाना नही होता.
एहसास का खत्म हो जाना, मुस्कुराहटे भुल जाना,
जिन्दगी बेरंग सा लगना, हसने से डर लगना,
तनहाईयों का मुकद्दर बन जाना,
क्या ये सब मरने के बराबर नही है ?
जान निकल जाए तो दर्द से जान छूटती है
मगर जीते जी मरना बहुत तकलीफ देता है
सांसे तो चलती है लेकिन जान बाकि रहती है
जिस्म भी होता है मगर ना जिन्दगी होती है
और ना जिन्दा रहने की तमन्ना..
सिर्फ जिन्दगी गुजारी जाती है जिन्दगी जी नही जाती।
क्या ये वाली मौत जान निकल जाने वाली मौत से
ज्यादा तकलीफ वाली नही होती ?
क्या इस तरह जिये जाने को
मौत नही कहा जा सकता...!!
💔
©Ak.writer_2.0
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