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New सावन रिमझिम बरसे Status, Photo, Video

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White रिमझिम पाऊस.... ढग आले दाटूनी आकाशी सुरू झाली त्यांची इकडे तिकडे धावपळ रिमझिम धो धो बरसला पाऊस मोत्यांच्या गारांनी भरली ओंजळ विजांच्या कडकडाटानी नभी चमकुनी मांडला खेळ सांज अंबरी दाटली प्रकाशाची लखलखीत वेळ मनावर उमटली काहीसी अंधाराची छटा निराळी ओढ लागली घरट्याची साद घाली पक्षी त्या कातरवेळी गवताची सुरू झाली जमिनीवरती चुळबूळ मातीच्या त्या गंधाची मनमोहक अलगशी दरवळ टप टप पावसाचा आला गालावरती एक ओघळ सरसर निसटूनी गेला खाली ओल्या आसवांबरोबर घरंगळ लोकांची केली या पावसाने नुसती घाईघाईची पळापळ रस्त्यावरती वाहनांची जमा झाली एकमेकास रेटूनी भली मोठी वर्दळ ©Mayuri Bhosale

#मराठीकविता #रिमझिम  White रिमझिम पाऊस....

ढग आले दाटूनी आकाशी 
सुरू झाली त्यांची इकडे तिकडे धावपळ

                रिमझिम धो धो बरसला पाऊस 
                मोत्यांच्या गारांनी भरली ओंजळ 

विजांच्या कडकडाटानी नभी 
चमकुनी मांडला खेळ 

                सांज अंबरी दाटली 
                प्रकाशाची लखलखीत वेळ

मनावर उमटली काहीसी 
अंधाराची छटा निराळी 

                 ओढ लागली घरट्याची 
                  साद घाली पक्षी त्या कातरवेळी 

गवताची सुरू झाली 
जमिनीवरती चुळबूळ 

                    मातीच्या त्या गंधाची
                    मनमोहक अलगशी दरवळ

टप टप पावसाचा आला
गालावरती एक ओघळ

                     सरसर निसटूनी गेला खाली
                     ओल्या आसवांबरोबर घरंगळ 

लोकांची केली या पावसाने 
नुसती घाईघाईची पळापळ

                      रस्त्यावरती वाहनांची जमा झाली 
                      एकमेकास रेटूनी भली मोठी वर्दळ

©Mayuri Bhosale

#रिमझिम पाऊस

11 Love

प्रेम की वेदी तुम आते हो एक आस लेकर, तुम जाते हो एक आस देकर। ना जाने कौन हो तुम मेरे, तुम जाते हो एक ख़ुशी देकर। तुम आते हो एक उम्मीद लेकर, तुम जाते हो एक ख़्वाब देकर। ना जाने कब तक साथ दोगे, तुम जाते हो एक एहसास देकर। कुछ ख़्वाबों को सजा रही हूँ, बिन कहे कहानी गुनगुना रही हूँ। जब आओगे, तुमसे कुछ लेना, पूर्ण कर दो मुझे कसम देकर। भरी सावन में छेड़ती सखियाँ, ले चलो अब गवाँना कराकर। अब बाबुल का घर न भाए, ले आओ डोली सुंदर सजाकर। मेहंदी में मैं नाम छुपाऊँ, ढूँढ़ना तुम मेरे हाथों को जोड़कर। मैं तो तेरा रस्ता देखूँगी, तेरे प्रेम का गहरा रंग चढ़ाकर। अधूरे ख़्वाबों को सजा दो, आ जाओ अब सेहरा बांधकर। ले चलो मुझे अपने आंगन, प्रेम की अंतिम वेदी पर बैठकर। भरे रहें एहसासों से आंगन, बस छू लो मुझे हाथों में लेकर। बिरहन जीवन से कर दो रिहा, सूनी मांग में सिंदूर भरकर। ©theABHAYSINGH_BIPIN

#शायरी #togetherforever  प्रेम की वेदी

तुम आते हो एक आस लेकर,
तुम जाते हो एक आस देकर।
ना जाने कौन हो तुम मेरे,
तुम जाते हो एक ख़ुशी देकर।

तुम आते हो एक उम्मीद लेकर,
तुम जाते हो एक ख़्वाब देकर।
ना जाने कब तक साथ दोगे,
तुम जाते हो एक एहसास देकर।

कुछ ख़्वाबों को सजा रही हूँ,
बिन कहे कहानी गुनगुना रही हूँ।
जब आओगे, तुमसे कुछ लेना,
पूर्ण कर दो मुझे कसम देकर।

भरी सावन में छेड़ती सखियाँ,
ले चलो अब गवाँना कराकर।
अब बाबुल का घर न भाए,
ले आओ डोली सुंदर सजाकर।

मेहंदी में मैं नाम छुपाऊँ,
ढूँढ़ना तुम मेरे हाथों को जोड़कर।
मैं तो तेरा रस्ता देखूँगी,
तेरे प्रेम का गहरा रंग चढ़ाकर।

अधूरे ख़्वाबों को सजा दो,
आ जाओ अब सेहरा बांधकर।
ले चलो मुझे अपने आंगन,
प्रेम की अंतिम वेदी पर बैठकर।

भरे रहें एहसासों से आंगन,
बस छू लो मुझे हाथों में लेकर।
बिरहन जीवन से कर दो रिहा,
सूनी मांग में सिंदूर भरकर।

©theABHAYSINGH_BIPIN

#togetherforever @Anupriya Rakhie.. "दिल की आवाज़" writer Sunita singh Arab ab tu SAB par najar Rakha kar Jodi jiski Amar banaa de usi ka D

14 Love

Unsplash कभी पूस की ठिठुरन बनकर अंग अंग टीस रहा हूँ ! कभी शब्द का सावन बनकर, अंतर सींच रहा हूँ !! कभी समय के गलियारे में,मुट्ठी भींच रहा हूँ ! जिनसे बिछड़ा उनकी यादें,पल पल खींच रहा हूँ !! ✍️✍️ रवि श्रीवास्तव ©Ravi Srivastava

#कविता  Unsplash कभी पूस की ठिठुरन बनकर अंग अंग टीस रहा हूँ !
कभी शब्द का सावन बनकर, अंतर सींच रहा हूँ !!

कभी समय के गलियारे में,मुट्ठी भींच रहा हूँ !
जिनसे बिछड़ा उनकी यादें,पल पल खींच रहा हूँ !!

✍️✍️
रवि श्रीवास्तव

©Ravi Srivastava

कभी पूस की ठिठुरन बनकर अंग अंग टीस रहा हूँ ! कभी शब्द का सावन बनकर, अंतर सींच रहा हूँ !! कभी समय के गलियारे में,मुट्ठी भींच रहा हूँ ! जिनसे

16 Love

White रिमझिम पाऊस.... ढग आले दाटूनी आकाशी सुरू झाली त्यांची इकडे तिकडे धावपळ रिमझिम धो धो बरसला पाऊस मोत्यांच्या गारांनी भरली ओंजळ विजांच्या कडकडाटानी नभी चमकुनी मांडला खेळ सांज अंबरी दाटली प्रकाशाची लखलखीत वेळ मनावर उमटली काहीसी अंधाराची छटा निराळी ओढ लागली घरट्याची साद घाली पक्षी त्या कातरवेळी गवताची सुरू झाली जमिनीवरती चुळबूळ मातीच्या त्या गंधाची मनमोहक अलगशी दरवळ टप टप पावसाचा आला गालावरती एक ओघळ सरसर निसटूनी गेला खाली ओल्या आसवांबरोबर घरंगळ लोकांची केली या पावसाने नुसती घाईघाईची पळापळ रस्त्यावरती वाहनांची जमा झाली एकमेकास रेटूनी भली मोठी वर्दळ ©Mayuri Bhosale

#मराठीकविता #रिमझिम  White रिमझिम पाऊस....

ढग आले दाटूनी आकाशी 
सुरू झाली त्यांची इकडे तिकडे धावपळ

                रिमझिम धो धो बरसला पाऊस 
                मोत्यांच्या गारांनी भरली ओंजळ 

विजांच्या कडकडाटानी नभी 
चमकुनी मांडला खेळ 

                सांज अंबरी दाटली 
                प्रकाशाची लखलखीत वेळ

मनावर उमटली काहीसी 
अंधाराची छटा निराळी 

                 ओढ लागली घरट्याची 
                  साद घाली पक्षी त्या कातरवेळी 

गवताची सुरू झाली 
जमिनीवरती चुळबूळ 

                    मातीच्या त्या गंधाची
                    मनमोहक अलगशी दरवळ

टप टप पावसाचा आला
गालावरती एक ओघळ

                     सरसर निसटूनी गेला खाली
                     ओल्या आसवांबरोबर घरंगळ 

लोकांची केली या पावसाने 
नुसती घाईघाईची पळापळ

                      रस्त्यावरती वाहनांची जमा झाली 
                      एकमेकास रेटूनी भली मोठी वर्दळ

©Mayuri Bhosale

#रिमझिम पाऊस

11 Love

प्रेम की वेदी तुम आते हो एक आस लेकर, तुम जाते हो एक आस देकर। ना जाने कौन हो तुम मेरे, तुम जाते हो एक ख़ुशी देकर। तुम आते हो एक उम्मीद लेकर, तुम जाते हो एक ख़्वाब देकर। ना जाने कब तक साथ दोगे, तुम जाते हो एक एहसास देकर। कुछ ख़्वाबों को सजा रही हूँ, बिन कहे कहानी गुनगुना रही हूँ। जब आओगे, तुमसे कुछ लेना, पूर्ण कर दो मुझे कसम देकर। भरी सावन में छेड़ती सखियाँ, ले चलो अब गवाँना कराकर। अब बाबुल का घर न भाए, ले आओ डोली सुंदर सजाकर। मेहंदी में मैं नाम छुपाऊँ, ढूँढ़ना तुम मेरे हाथों को जोड़कर। मैं तो तेरा रस्ता देखूँगी, तेरे प्रेम का गहरा रंग चढ़ाकर। अधूरे ख़्वाबों को सजा दो, आ जाओ अब सेहरा बांधकर। ले चलो मुझे अपने आंगन, प्रेम की अंतिम वेदी पर बैठकर। भरे रहें एहसासों से आंगन, बस छू लो मुझे हाथों में लेकर। बिरहन जीवन से कर दो रिहा, सूनी मांग में सिंदूर भरकर। ©theABHAYSINGH_BIPIN

#शायरी #togetherforever  प्रेम की वेदी

तुम आते हो एक आस लेकर,
तुम जाते हो एक आस देकर।
ना जाने कौन हो तुम मेरे,
तुम जाते हो एक ख़ुशी देकर।

तुम आते हो एक उम्मीद लेकर,
तुम जाते हो एक ख़्वाब देकर।
ना जाने कब तक साथ दोगे,
तुम जाते हो एक एहसास देकर।

कुछ ख़्वाबों को सजा रही हूँ,
बिन कहे कहानी गुनगुना रही हूँ।
जब आओगे, तुमसे कुछ लेना,
पूर्ण कर दो मुझे कसम देकर।

भरी सावन में छेड़ती सखियाँ,
ले चलो अब गवाँना कराकर।
अब बाबुल का घर न भाए,
ले आओ डोली सुंदर सजाकर।

मेहंदी में मैं नाम छुपाऊँ,
ढूँढ़ना तुम मेरे हाथों को जोड़कर।
मैं तो तेरा रस्ता देखूँगी,
तेरे प्रेम का गहरा रंग चढ़ाकर।

अधूरे ख़्वाबों को सजा दो,
आ जाओ अब सेहरा बांधकर।
ले चलो मुझे अपने आंगन,
प्रेम की अंतिम वेदी पर बैठकर।

भरे रहें एहसासों से आंगन,
बस छू लो मुझे हाथों में लेकर।
बिरहन जीवन से कर दो रिहा,
सूनी मांग में सिंदूर भरकर।

©theABHAYSINGH_BIPIN

#togetherforever @Anupriya Rakhie.. "दिल की आवाज़" writer Sunita singh Arab ab tu SAB par najar Rakha kar Jodi jiski Amar banaa de usi ka D

14 Love

Unsplash कभी पूस की ठिठुरन बनकर अंग अंग टीस रहा हूँ ! कभी शब्द का सावन बनकर, अंतर सींच रहा हूँ !! कभी समय के गलियारे में,मुट्ठी भींच रहा हूँ ! जिनसे बिछड़ा उनकी यादें,पल पल खींच रहा हूँ !! ✍️✍️ रवि श्रीवास्तव ©Ravi Srivastava

#कविता  Unsplash कभी पूस की ठिठुरन बनकर अंग अंग टीस रहा हूँ !
कभी शब्द का सावन बनकर, अंतर सींच रहा हूँ !!

कभी समय के गलियारे में,मुट्ठी भींच रहा हूँ !
जिनसे बिछड़ा उनकी यादें,पल पल खींच रहा हूँ !!

✍️✍️
रवि श्रीवास्तव

©Ravi Srivastava

कभी पूस की ठिठुरन बनकर अंग अंग टीस रहा हूँ ! कभी शब्द का सावन बनकर, अंतर सींच रहा हूँ !! कभी समय के गलियारे में,मुट्ठी भींच रहा हूँ ! जिनसे

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