tags

New इंसाफ की डगर पे Status, Photo, Video

Find the latest Status about इंसाफ की डगर पे from top creators only on Nojoto App. Also find trending photos & videos about इंसाफ की डगर पे.

  • Latest
  • Popular
  • Video

White जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते । ©Jitendra Pal

#Motivational #Thinking  White जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते ।

©Jitendra Pal

#Thinking जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते । motivational quotes in hindi

11 Love

White आधे रस्ते पे मुझे छोड़ गया.. जाने क्यों मेरे दिल को तोड़ गया.. यूसुफ़ आर खान... ©F M POETRY

#शायरी #आधे  White आधे रस्ते पे मुझे छोड़ गया..

जाने क्यों मेरे दिल को तोड़ गया..



यूसुफ़ आर खान...

©F M POETRY

#आधे रस्ते पे....

14 Love

White दिन पे हँसता हूँ कभी रात पे हँसता हूँ मैं अब तो खुद खुद के ख़यालात पे हँसता हूँ मैं पहले पहले तो ज़माने पे हँसी आती थी और अब यार के हालात पे हँसता हूँ मैं पहले रोता हूँ मेरे यार तेरी फुर्क़त में बाद में वक्त ए मुलाक़ात पे हँसता हूँ मैं मेरी आदत तुझे मालूम नही है शायद हँसने वाले तेरी हर बात पे हँसता हूँ मैं कल मुझे तेरे जवाबों पे हँसी आती थी और अब खुद के सवालात पे हँसता हूँ मैं कर दिए जिसने यहाँ मशअले मसाईल कितने यार आरिज़ तेरी उस ज़ात पे हँसता हूँ मैं ... ©dilkibaatwithamit

 White दिन पे  हँसता  हूँ कभी  रात पे  हँसता हूँ मैं
अब तो खुद खुद के ख़यालात पे हँसता हूँ मैं

पहले पहले तो ज़माने पे हँसी आती थी 
और अब यार के हालात पे हँसता हूँ मैं 

पहले रोता हूँ मेरे यार तेरी फुर्क़त में
बाद में वक्त ए मुलाक़ात पे हँसता हूँ मैं 

मेरी आदत तुझे मालूम नही है शायद
हँसने वाले तेरी हर बात पे हँसता हूँ मैं 

कल मुझे तेरे जवाबों पे हँसी आती थी 
और अब खुद के सवालात पे हँसता हूँ मैं 

कर दिए जिसने यहाँ मशअले मसाईल कितने 
यार आरिज़ तेरी उस ज़ात पे हँसता हूँ मैं
...

©dilkibaatwithamit

दिन पे हँसता हूँ कभी रात पे हँसता हूँ मैं अब तो खुद खुद के ख़यालात पे हँसता हूँ मैं पहले पहले तो ज़माने पे हँसी आती थी और अब यार के हा

19 Love

White खुद पे भरोसा हो तो आप हर मुसीबत से निकल सकते है..🔥 ©Prem Kashyap

#Motivational #Trending #motivate #viral  White खुद पे भरोसा हो तो आप हर मुसीबत से निकल सकते है..🔥

©Prem Kashyap

खुद पे भरोसा हो तो #viral #Trending #motivate

9 Love

किया नहीं संसार से मुक्ति का जतन अगर बन जाता सुख संसार स्वयं बन्धन की डगर ©Shiv Narayan Saxena

#सुप्रभात  किया नहीं  संसार से मुक्ति का जतन अगर 
बन जाता सुख संसार स्वयं बन्धन की डगर

©Shiv Narayan Saxena

#सुप्रभात बंधन की डगर poetry in hindi

17 Love

शब्द सृजन की सदी अनोखी अनदेखी कुछ अनजानी सी डगर, ढूंढ रहा वो अपनी सी सुनहरी सहर। व्यापक विरूपाक्ष का व्यवसाय सा ओझल, जिंदगी बिन सादगी हो रही बेरंग सी बोझल। नितदिन न्योतित निहायत से निर्मित, मानव मंचित मोह माया में हो मिश्रित। काल की कालिका से हो कलंकित, खग खोजे खोह ख़लिश मुक्त खोखलित। गमन गति गीत से हो गतिमय ग्रसित, घृणा घेर घूर घर घाल घड़ी घालित। चमक चेतन चैतन्य चिन्मय में चीर चिंतन, छटी छठा छोह छः छल छीछल की छनछन। जीवन जटिल जीभ जंबू जाल जल से जलना, झंकृत झांझ झांझर झंझट झपट झेल बना झरना। टूटी टहनी टोहे टकराव की टंकार टंकित टिटहरी, ठूंठ ठहर ठौर ठग ठनकती ठिगनी ठकुराई की ठुमरी। डाकिया डर डपटे डगरी डकैत डंठल डसे डुगडुगाई, ढूंढे ढोंगी ढपली ढोलक ढाबा ढकोसलायुक्त ढिठाई। तिल तिल तीर तोरण तकती तेज त्यागी की तरूणाई, थाम थाली थिरकी थकी थोड़ा थपकी से थम थर्राई। दाम दया दंड दमनकारी दृष्टिगोचर दानव द्राक्ष दूषिताई, धर्म ध्यान धर धीरज ध्येय धन धवन ध्वजा धाय धराई। पाहुन पाए पोल्हाए पिंजरा पवन पोषित प्रेम पाप पनपाय, फिरे फनी फेरत फूले फ़राक फर्क फर्ज फैल फ़नफ़नाय। बनारसी बहुल बहुसंख्यक बहुलता बैर बेचैनी बहाए, भोले भंवर में भयानक भयंकर भजन भोजन भरमाए। यज्ञ यति योनि याज्ञवल् युगान्तर योग योग्य यमनयान, रोग रहित रेवती रंक रंजन रंगोली रंगाई राग रसिकपान। लोभ लाभ ललित लक्ष्य लंका ललाट लाग लपेट लगाए, वजन वारि वाक्य विकास वांछनीय विशेषता की विधाए। संकल्प स्तोत्र से संबंधित स्थित समाधानयुक्त संभावनाएं, शीर्ष शिखर शोषित शिशिर शेखर शनि शेष शुभकामनाएं। षट् षड्यंत्री षट्भुजी षड्यंत्रकारी षचि षट्कर्मित, हिमाचल हिमखंड हेमंत हजार हमलावार हठ हर्षित। क्षय क्षत्रिय क्षीण क्षति क्षणभंगुर क्षितिज क्षतिधारी, त्रिकालदर्शी त्रिरत्न त्रिपाद त्रेता त्रिगुण त्रय त्रिशरारी। श्रमिक श्रृंखला श्रुतिनन्दन श्रवण श्रमिक श्रुतिशास्त्री, ज्ञाचक ज्ञानी ज्ञानमीमांसा ज्ञानप्रकाश ज्ञपित ज्ञानदात्री। अनोखी अनदेखी कुछ अनजानी सी डगर, ढूंढ रहा वो अपनी सी सुनहरी सहर। - लेखक: बनारसी ©Banarasi..

#हिंदी_साहित्य #शब्दोंकाजादू #कवितासंग्रह #हिंदीकविता #अभिव्यक्ति #हिंदीप्रेम  शब्द सृजन की सदी

अनोखी अनदेखी कुछ अनजानी सी डगर,
ढूंढ रहा वो अपनी सी सुनहरी सहर।

व्यापक विरूपाक्ष का व्यवसाय सा ओझल,
जिंदगी बिन सादगी हो रही बेरंग सी बोझल।

नितदिन न्योतित निहायत से निर्मित,
मानव मंचित मोह माया में हो मिश्रित।

काल की कालिका से हो कलंकित,
खग खोजे खोह ख़लिश मुक्त खोखलित।

गमन गति गीत से हो गतिमय ग्रसित,
घृणा घेर घूर घर घाल घड़ी घालित।

चमक चेतन चैतन्य चिन्मय में चीर चिंतन,
छटी छठा छोह छः छल छीछल की छनछन।

जीवन जटिल जीभ जंबू जाल जल से जलना,
झंकृत झांझ झांझर झंझट झपट झेल बना झरना।

टूटी टहनी टोहे टकराव की टंकार टंकित टिटहरी,
ठूंठ ठहर ठौर ठग ठनकती ठिगनी ठकुराई की ठुमरी।

डाकिया डर डपटे डगरी डकैत डंठल डसे डुगडुगाई,
ढूंढे ढोंगी ढपली ढोलक ढाबा ढकोसलायुक्त ढिठाई।

तिल तिल तीर तोरण तकती तेज त्यागी की तरूणाई,
थाम थाली थिरकी थकी थोड़ा थपकी से थम थर्राई।

दाम दया दंड दमनकारी दृष्टिगोचर दानव द्राक्ष दूषिताई,
धर्म ध्यान धर धीरज ध्येय धन धवन ध्वजा धाय धराई।

पाहुन पाए पोल्हाए पिंजरा पवन पोषित प्रेम पाप पनपाय,
फिरे फनी फेरत फूले फ़राक फर्क फर्ज फैल फ़नफ़नाय।

बनारसी बहुल बहुसंख्यक बहुलता बैर बेचैनी बहाए,
भोले भंवर में भयानक भयंकर भजन भोजन भरमाए।

यज्ञ यति योनि याज्ञवल् युगान्तर योग योग्य यमनयान,
रोग रहित रेवती रंक रंजन रंगोली रंगाई राग रसिकपान।

लोभ लाभ ललित लक्ष्य लंका ललाट लाग लपेट लगाए,
वजन वारि वाक्य विकास वांछनीय विशेषता की विधाए।

संकल्प स्तोत्र से संबंधित स्थित समाधानयुक्त संभावनाएं,
शीर्ष शिखर शोषित शिशिर शेखर शनि शेष शुभकामनाएं।

षट् षड्यंत्री षट्भुजी षड्यंत्रकारी षचि षट्कर्मित,
हिमाचल हिमखंड हेमंत हजार हमलावार हठ हर्षित।

क्षय क्षत्रिय क्षीण क्षति क्षणभंगुर क्षितिज क्षतिधारी,
त्रिकालदर्शी त्रिरत्न त्रिपाद त्रेता त्रिगुण त्रय त्रिशरारी।

श्रमिक श्रृंखला श्रुतिनन्दन श्रवण श्रमिक श्रुतिशास्त्री,
ज्ञाचक ज्ञानी ज्ञानमीमांसा ज्ञानप्रकाश ज्ञपित ज्ञानदात्री।

अनोखी अनदेखी कुछ अनजानी सी डगर,
ढूंढ रहा वो अपनी सी सुनहरी सहर।

- लेखक: बनारसी

©Banarasi..

"अभिव्यक्ति की अनूठी कला - शब्दों की सदी में नई डगर की तलाश।" #शब्दसृजन #हिंदीकविता #हिंदी_साहित्य साहित्य #शब्दोंकाजादू #कवितासंग्रह #अभिव

16 Love

White जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते । ©Jitendra Pal

#Motivational #Thinking  White जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते ।

©Jitendra Pal

#Thinking जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते । motivational quotes in hindi

11 Love

White आधे रस्ते पे मुझे छोड़ गया.. जाने क्यों मेरे दिल को तोड़ गया.. यूसुफ़ आर खान... ©F M POETRY

#शायरी #आधे  White आधे रस्ते पे मुझे छोड़ गया..

जाने क्यों मेरे दिल को तोड़ गया..



यूसुफ़ आर खान...

©F M POETRY

#आधे रस्ते पे....

14 Love

White दिन पे हँसता हूँ कभी रात पे हँसता हूँ मैं अब तो खुद खुद के ख़यालात पे हँसता हूँ मैं पहले पहले तो ज़माने पे हँसी आती थी और अब यार के हालात पे हँसता हूँ मैं पहले रोता हूँ मेरे यार तेरी फुर्क़त में बाद में वक्त ए मुलाक़ात पे हँसता हूँ मैं मेरी आदत तुझे मालूम नही है शायद हँसने वाले तेरी हर बात पे हँसता हूँ मैं कल मुझे तेरे जवाबों पे हँसी आती थी और अब खुद के सवालात पे हँसता हूँ मैं कर दिए जिसने यहाँ मशअले मसाईल कितने यार आरिज़ तेरी उस ज़ात पे हँसता हूँ मैं ... ©dilkibaatwithamit

 White दिन पे  हँसता  हूँ कभी  रात पे  हँसता हूँ मैं
अब तो खुद खुद के ख़यालात पे हँसता हूँ मैं

पहले पहले तो ज़माने पे हँसी आती थी 
और अब यार के हालात पे हँसता हूँ मैं 

पहले रोता हूँ मेरे यार तेरी फुर्क़त में
बाद में वक्त ए मुलाक़ात पे हँसता हूँ मैं 

मेरी आदत तुझे मालूम नही है शायद
हँसने वाले तेरी हर बात पे हँसता हूँ मैं 

कल मुझे तेरे जवाबों पे हँसी आती थी 
और अब खुद के सवालात पे हँसता हूँ मैं 

कर दिए जिसने यहाँ मशअले मसाईल कितने 
यार आरिज़ तेरी उस ज़ात पे हँसता हूँ मैं
...

©dilkibaatwithamit

दिन पे हँसता हूँ कभी रात पे हँसता हूँ मैं अब तो खुद खुद के ख़यालात पे हँसता हूँ मैं पहले पहले तो ज़माने पे हँसी आती थी और अब यार के हा

19 Love

White खुद पे भरोसा हो तो आप हर मुसीबत से निकल सकते है..🔥 ©Prem Kashyap

#Motivational #Trending #motivate #viral  White खुद पे भरोसा हो तो आप हर मुसीबत से निकल सकते है..🔥

©Prem Kashyap

खुद पे भरोसा हो तो #viral #Trending #motivate

9 Love

किया नहीं संसार से मुक्ति का जतन अगर बन जाता सुख संसार स्वयं बन्धन की डगर ©Shiv Narayan Saxena

#सुप्रभात  किया नहीं  संसार से मुक्ति का जतन अगर 
बन जाता सुख संसार स्वयं बन्धन की डगर

©Shiv Narayan Saxena

#सुप्रभात बंधन की डगर poetry in hindi

17 Love

शब्द सृजन की सदी अनोखी अनदेखी कुछ अनजानी सी डगर, ढूंढ रहा वो अपनी सी सुनहरी सहर। व्यापक विरूपाक्ष का व्यवसाय सा ओझल, जिंदगी बिन सादगी हो रही बेरंग सी बोझल। नितदिन न्योतित निहायत से निर्मित, मानव मंचित मोह माया में हो मिश्रित। काल की कालिका से हो कलंकित, खग खोजे खोह ख़लिश मुक्त खोखलित। गमन गति गीत से हो गतिमय ग्रसित, घृणा घेर घूर घर घाल घड़ी घालित। चमक चेतन चैतन्य चिन्मय में चीर चिंतन, छटी छठा छोह छः छल छीछल की छनछन। जीवन जटिल जीभ जंबू जाल जल से जलना, झंकृत झांझ झांझर झंझट झपट झेल बना झरना। टूटी टहनी टोहे टकराव की टंकार टंकित टिटहरी, ठूंठ ठहर ठौर ठग ठनकती ठिगनी ठकुराई की ठुमरी। डाकिया डर डपटे डगरी डकैत डंठल डसे डुगडुगाई, ढूंढे ढोंगी ढपली ढोलक ढाबा ढकोसलायुक्त ढिठाई। तिल तिल तीर तोरण तकती तेज त्यागी की तरूणाई, थाम थाली थिरकी थकी थोड़ा थपकी से थम थर्राई। दाम दया दंड दमनकारी दृष्टिगोचर दानव द्राक्ष दूषिताई, धर्म ध्यान धर धीरज ध्येय धन धवन ध्वजा धाय धराई। पाहुन पाए पोल्हाए पिंजरा पवन पोषित प्रेम पाप पनपाय, फिरे फनी फेरत फूले फ़राक फर्क फर्ज फैल फ़नफ़नाय। बनारसी बहुल बहुसंख्यक बहुलता बैर बेचैनी बहाए, भोले भंवर में भयानक भयंकर भजन भोजन भरमाए। यज्ञ यति योनि याज्ञवल् युगान्तर योग योग्य यमनयान, रोग रहित रेवती रंक रंजन रंगोली रंगाई राग रसिकपान। लोभ लाभ ललित लक्ष्य लंका ललाट लाग लपेट लगाए, वजन वारि वाक्य विकास वांछनीय विशेषता की विधाए। संकल्प स्तोत्र से संबंधित स्थित समाधानयुक्त संभावनाएं, शीर्ष शिखर शोषित शिशिर शेखर शनि शेष शुभकामनाएं। षट् षड्यंत्री षट्भुजी षड्यंत्रकारी षचि षट्कर्मित, हिमाचल हिमखंड हेमंत हजार हमलावार हठ हर्षित। क्षय क्षत्रिय क्षीण क्षति क्षणभंगुर क्षितिज क्षतिधारी, त्रिकालदर्शी त्रिरत्न त्रिपाद त्रेता त्रिगुण त्रय त्रिशरारी। श्रमिक श्रृंखला श्रुतिनन्दन श्रवण श्रमिक श्रुतिशास्त्री, ज्ञाचक ज्ञानी ज्ञानमीमांसा ज्ञानप्रकाश ज्ञपित ज्ञानदात्री। अनोखी अनदेखी कुछ अनजानी सी डगर, ढूंढ रहा वो अपनी सी सुनहरी सहर। - लेखक: बनारसी ©Banarasi..

#हिंदी_साहित्य #शब्दोंकाजादू #कवितासंग्रह #हिंदीकविता #अभिव्यक्ति #हिंदीप्रेम  शब्द सृजन की सदी

अनोखी अनदेखी कुछ अनजानी सी डगर,
ढूंढ रहा वो अपनी सी सुनहरी सहर।

व्यापक विरूपाक्ष का व्यवसाय सा ओझल,
जिंदगी बिन सादगी हो रही बेरंग सी बोझल।

नितदिन न्योतित निहायत से निर्मित,
मानव मंचित मोह माया में हो मिश्रित।

काल की कालिका से हो कलंकित,
खग खोजे खोह ख़लिश मुक्त खोखलित।

गमन गति गीत से हो गतिमय ग्रसित,
घृणा घेर घूर घर घाल घड़ी घालित।

चमक चेतन चैतन्य चिन्मय में चीर चिंतन,
छटी छठा छोह छः छल छीछल की छनछन।

जीवन जटिल जीभ जंबू जाल जल से जलना,
झंकृत झांझ झांझर झंझट झपट झेल बना झरना।

टूटी टहनी टोहे टकराव की टंकार टंकित टिटहरी,
ठूंठ ठहर ठौर ठग ठनकती ठिगनी ठकुराई की ठुमरी।

डाकिया डर डपटे डगरी डकैत डंठल डसे डुगडुगाई,
ढूंढे ढोंगी ढपली ढोलक ढाबा ढकोसलायुक्त ढिठाई।

तिल तिल तीर तोरण तकती तेज त्यागी की तरूणाई,
थाम थाली थिरकी थकी थोड़ा थपकी से थम थर्राई।

दाम दया दंड दमनकारी दृष्टिगोचर दानव द्राक्ष दूषिताई,
धर्म ध्यान धर धीरज ध्येय धन धवन ध्वजा धाय धराई।

पाहुन पाए पोल्हाए पिंजरा पवन पोषित प्रेम पाप पनपाय,
फिरे फनी फेरत फूले फ़राक फर्क फर्ज फैल फ़नफ़नाय।

बनारसी बहुल बहुसंख्यक बहुलता बैर बेचैनी बहाए,
भोले भंवर में भयानक भयंकर भजन भोजन भरमाए।

यज्ञ यति योनि याज्ञवल् युगान्तर योग योग्य यमनयान,
रोग रहित रेवती रंक रंजन रंगोली रंगाई राग रसिकपान।

लोभ लाभ ललित लक्ष्य लंका ललाट लाग लपेट लगाए,
वजन वारि वाक्य विकास वांछनीय विशेषता की विधाए।

संकल्प स्तोत्र से संबंधित स्थित समाधानयुक्त संभावनाएं,
शीर्ष शिखर शोषित शिशिर शेखर शनि शेष शुभकामनाएं।

षट् षड्यंत्री षट्भुजी षड्यंत्रकारी षचि षट्कर्मित,
हिमाचल हिमखंड हेमंत हजार हमलावार हठ हर्षित।

क्षय क्षत्रिय क्षीण क्षति क्षणभंगुर क्षितिज क्षतिधारी,
त्रिकालदर्शी त्रिरत्न त्रिपाद त्रेता त्रिगुण त्रय त्रिशरारी।

श्रमिक श्रृंखला श्रुतिनन्दन श्रवण श्रमिक श्रुतिशास्त्री,
ज्ञाचक ज्ञानी ज्ञानमीमांसा ज्ञानप्रकाश ज्ञपित ज्ञानदात्री।

अनोखी अनदेखी कुछ अनजानी सी डगर,
ढूंढ रहा वो अपनी सी सुनहरी सहर।

- लेखक: बनारसी

©Banarasi..

"अभिव्यक्ति की अनूठी कला - शब्दों की सदी में नई डगर की तलाश।" #शब्दसृजन #हिंदीकविता #हिंदी_साहित्य साहित्य #शब्दोंकाजादू #कवितासंग्रह #अभिव

16 Love

Trending Topic