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हास्य-व्यंग्य ©Manojkumar Srivastava

#कॉमेडी #हास्य  हास्य-व्यंग्य

©Manojkumar Srivastava

#हास्य और व्यंग्य# हिंदी चुटकुले

12 Love

सर्द रातों की हवाओं ने सताया इस तरह। मैं ठिठुरता रह गया बिस्तर कंटीले हो गए॥ बर्फ से कुछ बात करती चल रही थी ये हवाएं, फिर अचानक सायं से कम्बल के अंदर आ गई। पांव को कितना सिकोड़ूं पांव बाहर ही रहा, अवसर मिला ये फेफड़ों से जाने' कब टकरा गई॥ खाँसियां रुकती नहीं सब अंग ढीले हो गए। कपकपाती ठंड में फैशन हमारा था चरम पर कान के दरवाजों से ये वायु घुसती ही गई। सनसनाती घुस चुकी थी कुछ हवाएं इस बदन में मेरे तन की हड्डियां हर पल अकड़ती ही गई॥ पूस की इस रात सब मंजर रंगीले हो गए। कर्ण में धारण किए श्रुति यंत्र को घर की तरफ, ठंड से छुपते छुपाते गीत सुनते जा रहे थे। पेट में मेरे अचानक दर्द ने आहट दिया, साथ ही संगीत सारे सुर में सहसा बज उठे थे॥ अंततः चुपके से' अंतर्वस्त्र पीले हो गए॥ ©वरुण तिवारी

#snow  सर्द रातों की हवाओं ने सताया इस तरह।
मैं ठिठुरता रह गया बिस्तर कंटीले हो गए॥

बर्फ से कुछ बात  करती  चल रही थी ये  हवाएं,
फिर अचानक सायं से कम्बल के अंदर आ गई।
पांव  को   कितना   सिकोड़ूं  पांव  बाहर ही रहा,
अवसर मिला ये फेफड़ों से जाने' कब टकरा गई॥

खाँसियां  रुकती  नहीं  सब  अंग  ढीले  हो  गए।

कपकपाती  ठंड  में  फैशन  हमारा था चरम पर
कान  के  दरवाजों  से  ये  वायु  घुसती  ही  गई।
सनसनाती घुस चुकी थी कुछ हवाएं इस बदन में
मेरे  तन  की  हड्डियां  हर  पल अकड़ती ही गई॥

पूस  की   इस   रात  सब  मंजर  रंगीले  हो  गए।

कर्ण में धारण किए श्रुति यंत्र को घर की तरफ,
ठंड  से  छुपते  छुपाते  गीत  सुनते  जा  रहे  थे।
पेट  में   मेरे    अचानक   दर्द  ने  आहट  दिया,
साथ ही संगीत सारे सुर में सहसा बज उठे थे॥

अंततः  चुपके  से'  अंतर्वस्त्र   पीले   हो  गए॥

©वरुण तिवारी

#snow हास्य रचना

10 Love

a-person-standing-on-a-beach-at-sunset कमज़ोर कदमों में भी आशा है, हम दृढ़ पथ के राही हैं। हममें केवल जीतने की अभिलाषा है। ©aarush

#SunSet  a-person-standing-on-a-beach-at-sunset कमज़ोर कदमों में भी आशा है,
हम दृढ़ पथ के राही हैं।
हममें केवल जीतने की अभिलाषा है।

©aarush

#SunSet स्वरचित कविता hindi poetry on life

18 Love

Unsplash सुबह सुबह दीवार पर लगी घंटी का बजना चैन से जागने भी नहीं देती ख़लती है सुरज कि किरणों का खिड़की तक न आना मुर्गों , कौओं ओर चिड़ियों का न चहचहाना ©aarush

#Book  Unsplash सुबह सुबह दीवार पर लगी घंटी
का बजना 
चैन से जागने भी नहीं देती 
ख़लती है 
सुरज कि किरणों का खिड़की तक न आना 
मुर्गों , कौओं ओर चिड़ियों का न चहचहाना

©aarush

#Book स्वरचित कविता hindi poetry

10 Love

Unsplash सुरज कि किरणों का बिस्तरों पर न पड़ना ख़ाली आंगन में गौरैया का न आना मुर्गों कौओं का चुप हो जाना बड़ा कठीन होता है सुबह सुबह , दीवार पर लगी घंटियों को सुन कर चैन से जागना ©aarush

#Book  Unsplash सुरज कि किरणों का बिस्तरों पर न पड़ना 
ख़ाली आंगन में गौरैया का न आना 
मुर्गों कौओं का चुप हो जाना 
बड़ा कठीन होता है 
सुबह सुबह , दीवार पर लगी
घंटियों को सुन कर 
चैन से जागना

©aarush

#Book स्वरचित कविता hindi poetry

10 Love

Unsplash **हवाओं की जब बात हुई तो उसको खुशबू लिखा मैंने। आसमान की बात हुई तो उसको चांद कहा मैंने। फूलों की बात छिड़ी तो उसको चमेली लिखा मैंने। बगानों की बात छिड़ी तो उसको शरारती तितली बताया मैंने। सूरज की रोशनी से भी ज्यादा तेज है उसके चेहरे पर, सितारे भी फीके लगते हैं उसकी आंखों के असर पर। शब्द भी खत्म हो गए खूबसूरती की, उसको अब क्या लिखूंगा मैं। बड़े बेचैन हैं डायरी के पन्ने, उसका अब नाम लिखूंगा मैं।** ©aarush

#3rdpost  Unsplash **हवाओं की जब बात हुई तो
उसको खुशबू लिखा मैंने।
आसमान की बात हुई तो
उसको चांद कहा मैंने।

फूलों की बात छिड़ी तो
उसको चमेली लिखा मैंने।
बगानों की बात छिड़ी तो
उसको शरारती तितली बताया मैंने।

सूरज की रोशनी से भी ज्यादा
तेज है उसके चेहरे पर,
सितारे भी फीके लगते हैं
उसकी आंखों के असर पर।

शब्द भी खत्म हो गए खूबसूरती की,
उसको अब क्या लिखूंगा मैं।
बड़े बेचैन हैं डायरी के पन्ने,
उसका अब नाम लिखूंगा मैं।**

©aarush

#3rdpost स्वरचित कविता hindi poetry on life

19 Love

हास्य-व्यंग्य ©Manojkumar Srivastava

#कॉमेडी #हास्य  हास्य-व्यंग्य

©Manojkumar Srivastava

#हास्य और व्यंग्य# हिंदी चुटकुले

12 Love

सर्द रातों की हवाओं ने सताया इस तरह। मैं ठिठुरता रह गया बिस्तर कंटीले हो गए॥ बर्फ से कुछ बात करती चल रही थी ये हवाएं, फिर अचानक सायं से कम्बल के अंदर आ गई। पांव को कितना सिकोड़ूं पांव बाहर ही रहा, अवसर मिला ये फेफड़ों से जाने' कब टकरा गई॥ खाँसियां रुकती नहीं सब अंग ढीले हो गए। कपकपाती ठंड में फैशन हमारा था चरम पर कान के दरवाजों से ये वायु घुसती ही गई। सनसनाती घुस चुकी थी कुछ हवाएं इस बदन में मेरे तन की हड्डियां हर पल अकड़ती ही गई॥ पूस की इस रात सब मंजर रंगीले हो गए। कर्ण में धारण किए श्रुति यंत्र को घर की तरफ, ठंड से छुपते छुपाते गीत सुनते जा रहे थे। पेट में मेरे अचानक दर्द ने आहट दिया, साथ ही संगीत सारे सुर में सहसा बज उठे थे॥ अंततः चुपके से' अंतर्वस्त्र पीले हो गए॥ ©वरुण तिवारी

#snow  सर्द रातों की हवाओं ने सताया इस तरह।
मैं ठिठुरता रह गया बिस्तर कंटीले हो गए॥

बर्फ से कुछ बात  करती  चल रही थी ये  हवाएं,
फिर अचानक सायं से कम्बल के अंदर आ गई।
पांव  को   कितना   सिकोड़ूं  पांव  बाहर ही रहा,
अवसर मिला ये फेफड़ों से जाने' कब टकरा गई॥

खाँसियां  रुकती  नहीं  सब  अंग  ढीले  हो  गए।

कपकपाती  ठंड  में  फैशन  हमारा था चरम पर
कान  के  दरवाजों  से  ये  वायु  घुसती  ही  गई।
सनसनाती घुस चुकी थी कुछ हवाएं इस बदन में
मेरे  तन  की  हड्डियां  हर  पल अकड़ती ही गई॥

पूस  की   इस   रात  सब  मंजर  रंगीले  हो  गए।

कर्ण में धारण किए श्रुति यंत्र को घर की तरफ,
ठंड  से  छुपते  छुपाते  गीत  सुनते  जा  रहे  थे।
पेट  में   मेरे    अचानक   दर्द  ने  आहट  दिया,
साथ ही संगीत सारे सुर में सहसा बज उठे थे॥

अंततः  चुपके  से'  अंतर्वस्त्र   पीले   हो  गए॥

©वरुण तिवारी

#snow हास्य रचना

10 Love

a-person-standing-on-a-beach-at-sunset कमज़ोर कदमों में भी आशा है, हम दृढ़ पथ के राही हैं। हममें केवल जीतने की अभिलाषा है। ©aarush

#SunSet  a-person-standing-on-a-beach-at-sunset कमज़ोर कदमों में भी आशा है,
हम दृढ़ पथ के राही हैं।
हममें केवल जीतने की अभिलाषा है।

©aarush

#SunSet स्वरचित कविता hindi poetry on life

18 Love

Unsplash सुबह सुबह दीवार पर लगी घंटी का बजना चैन से जागने भी नहीं देती ख़लती है सुरज कि किरणों का खिड़की तक न आना मुर्गों , कौओं ओर चिड़ियों का न चहचहाना ©aarush

#Book  Unsplash सुबह सुबह दीवार पर लगी घंटी
का बजना 
चैन से जागने भी नहीं देती 
ख़लती है 
सुरज कि किरणों का खिड़की तक न आना 
मुर्गों , कौओं ओर चिड़ियों का न चहचहाना

©aarush

#Book स्वरचित कविता hindi poetry

10 Love

Unsplash सुरज कि किरणों का बिस्तरों पर न पड़ना ख़ाली आंगन में गौरैया का न आना मुर्गों कौओं का चुप हो जाना बड़ा कठीन होता है सुबह सुबह , दीवार पर लगी घंटियों को सुन कर चैन से जागना ©aarush

#Book  Unsplash सुरज कि किरणों का बिस्तरों पर न पड़ना 
ख़ाली आंगन में गौरैया का न आना 
मुर्गों कौओं का चुप हो जाना 
बड़ा कठीन होता है 
सुबह सुबह , दीवार पर लगी
घंटियों को सुन कर 
चैन से जागना

©aarush

#Book स्वरचित कविता hindi poetry

10 Love

Unsplash **हवाओं की जब बात हुई तो उसको खुशबू लिखा मैंने। आसमान की बात हुई तो उसको चांद कहा मैंने। फूलों की बात छिड़ी तो उसको चमेली लिखा मैंने। बगानों की बात छिड़ी तो उसको शरारती तितली बताया मैंने। सूरज की रोशनी से भी ज्यादा तेज है उसके चेहरे पर, सितारे भी फीके लगते हैं उसकी आंखों के असर पर। शब्द भी खत्म हो गए खूबसूरती की, उसको अब क्या लिखूंगा मैं। बड़े बेचैन हैं डायरी के पन्ने, उसका अब नाम लिखूंगा मैं।** ©aarush

#3rdpost  Unsplash **हवाओं की जब बात हुई तो
उसको खुशबू लिखा मैंने।
आसमान की बात हुई तो
उसको चांद कहा मैंने।

फूलों की बात छिड़ी तो
उसको चमेली लिखा मैंने।
बगानों की बात छिड़ी तो
उसको शरारती तितली बताया मैंने।

सूरज की रोशनी से भी ज्यादा
तेज है उसके चेहरे पर,
सितारे भी फीके लगते हैं
उसकी आंखों के असर पर।

शब्द भी खत्म हो गए खूबसूरती की,
उसको अब क्या लिखूंगा मैं।
बड़े बेचैन हैं डायरी के पन्ने,
उसका अब नाम लिखूंगा मैं।**

©aarush

#3rdpost स्वरचित कविता hindi poetry on life

19 Love

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