सब रिश्तयां में बेहतर रिश्ता होवै सै सगे भाई का
नूहां तै कदे मांस दूर ना एक खून मां जाई का।
1. भाई के जैसा दुनिया में को यार नहीं होता
सागी भाई जितना कोई वफादार नहीं होता
जिस घर में आपस में भाई-भाई मैं नहीं होता
उजड़वासा होज्या सै वो घरबार नहीं होता।
जिस घर में हो प्रेम-प्यार उड़ै कोन्या काम लड़ाई का।
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2. भाईचारे का असली मतलब मैं तामनै समझाऊं।
भाईयां के बिन ना कोये चारा सागी अर्थ बताऊं।
अर कल्ले-कल्ले नै दुनिया पीटै कहगे काका-ताऊ
अर भाईया में जो ब्हेड़ भिड़ादें हों सै फैदा ठाऊ।
अरे घर का भेदी लंका ढहदे खोया फिरै बहकाई का।
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3. जिसकै भाई ना होते पूछो उन बहणा तै
सुन्ना लागै पीहर, मन ना लागे गहणा तै।
दुख आधा और खुशी दुगूणी मिलजुल कै न सहणा तै
बंधी बुहारी आच्छी हो सै, सुनो ऐकला रहणा तै।
अरे लोगां नै मौका मिलता ना चुगली करण बुराई का।
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4. दुख-सुख मैं और घटी-बधी मैं आवै काम भाईचारा
मूंह तै चाहे बोलैं भी ना फेर भी भाई प्यारा।
ब्याह-शादी सजै भाईयां गेल्यां नाचै कूणबा सारा।
भाईया गेल कमाई हो भाई ने भाई का सहारा।
विजय अपना मारै छांव मै गेरै, यो सार मेरी कविताई का।
©Vijay Vidrohi
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