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"बेटा जिस दिन बड़ा‌ होकर" अपने पैरों पर खड़ा हो जाए_ उस दिन.. पिता का संघर्ष आधा रह जाता_ और जिस दिन‌ वो बेटा_ पिता, परिवार की जिम्मेदारी को खुद उठाने लग जाता उस दिन पिता के जीवन‌ में हर्ष ही हर्ष हो‌ जाता.!! ©Shalini Nigam

#पिता #motivatation #yqbaba #yqdidi  "बेटा जिस दिन बड़ा‌ होकर" 
अपने पैरों पर खड़ा हो जाए_ उस दिन.. 
पिता का संघर्ष आधा रह जाता_
और जिस दिन‌ वो बेटा_ पिता, परिवार 
की जिम्मेदारी 
को खुद उठाने लग जाता उस दिन पिता 
के जीवन‌ में हर्ष ही हर्ष 
हो‌ जाता.!!

©Shalini Nigam

#पिता #Nojoto #yqdidi #yqbaba #Love #Life #motivatation

18 Love

बड़े होकर अपने पैरों पर खड़े हो जाओ तो "पिता" को आंखें_मत दिखाना_ क्योंकि यही वो "बैसाखी" है जिसने तुम्हें चलना, सम्हलना और अपने "पैरों" पर खड़ा होना सिखाया है‌! ©Shalini Nigam

#पिता #yqbaba #yqdidi  बड़े होकर अपने पैरों 
पर खड़े हो जाओ तो 
"पिता" को आंखें_मत 
दिखाना_ क्योंकि यही 
वो "बैसाखी" है जिसने 
तुम्हें चलना, सम्हलना 
और अपने "पैरों" पर 
खड़ा होना सिखाया है‌!

©Shalini Nigam

#पिता #Nojoto #yqdidi #yqbaba #Love #Life

11 Love

White पिता का वात्सल्य मां से बिल्कुल अलग होता है,एक क्षण पिता बच्चे को दुलार रहा होगा तो अगले ही क्षण उसे पीट रहा होगा. मां का वात्सल्य इसके विपरीत है,वो बच्चे की ज़िद,उनकी बदमाशी यूंही माफ कर देती है.मां का क्रोध बच्चे पर तब होता है जब उसकी किसी बात से उसका अहित हो रहा हो पर पिता बच्चे को दूसरों का अहित करने के लिए दण्ड देता है.आपने देखा होगा माएं बच्चों को कंधे पर नहीं बैठाती हैं ,वो उन्हें गोद में सुरक्षित रखना चाहतीं हैं,जबकि पिता बच्चे को अपनी उंगली के बाद सीधा अपना कंधा देता है बैठने के लिए, बिना डरे की वो नीचे गिर जाएगा,वो ऐसा करता है ताकि बच्चा दुनियां को एक ऊंचाई से देख सके,वो देख सके कि जमीन से ऊपर होते ही ये दुनियां कैसे अलग दिखने लगती है,छोटी दिखने लगती है.ताकि बच्चे में ये समझ बने कि उसे अपनी जगह कहां और कैसे बनानी है.पिता उसे परियों की कहानी नहीं सुनाता,चोट लगने पर रोने नहीं देता.जबकि बच्चे के लिए पिता बचपन में टॉफियां लाने वाला इंसान और जवानी में उसकी आजादियों पर ताला लगाने वाला हैवान से अधिक कुछ नहीं.पिता चाहे तो इस छवि को तोड़ सकता है,पर वो ऐसा नहीं करता क्योंकि पिता चाहता है कि बच्चा मजबूत बने,इतना मजबूत की जब उसे घर से बाहर जाना हो तो वो हिचके ना,इतना मजबूत की जीवन के किसी भी कठिन फैसले को लेने से वो डरे ना,इतना मजबूत की जब एक दिन उसे अपने पिता की अर्थी को कंधा देना हो तो कमजोर ना पड़े,टूट ना जाए,बल्कि वो याद करे कैसे बचपन में पिता ने उसे अपना कंधा दिया था.......! ©Andy Mann

#मोटिवेशनल #पिता  White पिता का वात्सल्य मां से बिल्कुल अलग होता है,एक क्षण पिता बच्चे को दुलार रहा होगा तो अगले ही क्षण उसे पीट रहा होगा. मां का वात्सल्य इसके विपरीत है,वो बच्चे की ज़िद,उनकी बदमाशी यूंही माफ कर देती है.मां का क्रोध बच्चे पर तब होता है जब उसकी किसी बात से उसका अहित हो रहा हो पर पिता बच्चे को दूसरों का अहित करने के लिए दण्ड देता है.आपने देखा होगा माएं बच्चों को कंधे पर नहीं बैठाती हैं ,वो उन्हें गोद में सुरक्षित रखना चाहतीं हैं,जबकि पिता बच्चे को अपनी उंगली के बाद सीधा अपना कंधा देता है बैठने के लिए, बिना डरे की वो नीचे गिर जाएगा,वो ऐसा करता है ताकि बच्चा दुनियां को एक ऊंचाई से देख सके,वो देख सके कि जमीन से ऊपर होते ही ये दुनियां कैसे अलग दिखने लगती है,छोटी दिखने लगती है.ताकि बच्चे में ये समझ बने कि उसे अपनी जगह कहां और कैसे बनानी है.पिता उसे परियों की कहानी नहीं सुनाता,चोट लगने पर रोने नहीं देता.जबकि बच्चे के लिए पिता बचपन में टॉफियां लाने वाला इंसान और जवानी में उसकी आजादियों पर ताला लगाने वाला हैवान से अधिक कुछ नहीं.पिता चाहे तो इस छवि को तोड़ सकता है,पर वो ऐसा नहीं करता क्योंकि पिता चाहता है कि बच्चा मजबूत बने,इतना मजबूत की जब उसे घर से बाहर जाना हो तो वो हिचके ना,इतना मजबूत की जीवन के किसी भी कठिन फैसले को लेने से वो डरे ना,इतना मजबूत की जब एक दिन उसे अपने पिता की अर्थी को कंधा देना हो तो कमजोर ना पड़े,टूट ना जाए,बल्कि वो याद करे कैसे बचपन में पिता ने उसे अपना कंधा दिया था.......!

©Andy Mann

#पिता @Arshad Siddiqui @Rakesh Srivastava @Ashutosh Mishra अदनासा- वैद्य (dr) उदयवीर सिंह

25 Love

White — Papa Ki Yaad Shayari पिता की याद में शायरी · 1. यूँ तो दुनिया के सारे गम मैं हंस के ढो लेता हूँ, · 2. मार-मार के पत्थर को एक जौहरी हीरा बनाता है, · 3. हाँ मैं खुश था उस बचपन में · 4. हर पल ©VIKHYAT REKWAR

 White — Papa Ki Yaad Shayari पिता की याद में शायरी · 1. यूँ तो दुनिया के सारे गम मैं हंस के ढो लेता हूँ, · 2. मार-मार के पत्थर को एक जौहरी हीरा बनाता है, · 3. हाँ मैं खुश था उस बचपन में · 4. हर पल

©VIKHYAT REKWAR

पिता की याद

14 Love

गुरु गोविंद सिंह जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं ©Sandeep Bunkar

#मोटिवेशनल #SunSet  गुरु गोविंद सिंह जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं

©Sandeep Bunkar

#SunSet मोटिवेशनल गुरु गोविंद सिंह

6 Love

White अगर इस धोखे भरे संसार में कोई तुमसे निस्वार्थ भाव से प्रेम करने वाला है तो वो सिर्फ तुम्हारे माता – पिता हैं। ©सूरज

#कोट्स #माता  White अगर इस धोखे भरे संसार में कोई तुमसे निस्वार्थ भाव से प्रेम करने वाला है तो वो सिर्फ तुम्हारे माता – पिता हैं।

©सूरज

#माता – पिता

22 Love

"बेटा जिस दिन बड़ा‌ होकर" अपने पैरों पर खड़ा हो जाए_ उस दिन.. पिता का संघर्ष आधा रह जाता_ और जिस दिन‌ वो बेटा_ पिता, परिवार की जिम्मेदारी को खुद उठाने लग जाता उस दिन पिता के जीवन‌ में हर्ष ही हर्ष हो‌ जाता.!! ©Shalini Nigam

#पिता #motivatation #yqbaba #yqdidi  "बेटा जिस दिन बड़ा‌ होकर" 
अपने पैरों पर खड़ा हो जाए_ उस दिन.. 
पिता का संघर्ष आधा रह जाता_
और जिस दिन‌ वो बेटा_ पिता, परिवार 
की जिम्मेदारी 
को खुद उठाने लग जाता उस दिन पिता 
के जीवन‌ में हर्ष ही हर्ष 
हो‌ जाता.!!

©Shalini Nigam

#पिता #Nojoto #yqdidi #yqbaba #Love #Life #motivatation

18 Love

बड़े होकर अपने पैरों पर खड़े हो जाओ तो "पिता" को आंखें_मत दिखाना_ क्योंकि यही वो "बैसाखी" है जिसने तुम्हें चलना, सम्हलना और अपने "पैरों" पर खड़ा होना सिखाया है‌! ©Shalini Nigam

#पिता #yqbaba #yqdidi  बड़े होकर अपने पैरों 
पर खड़े हो जाओ तो 
"पिता" को आंखें_मत 
दिखाना_ क्योंकि यही 
वो "बैसाखी" है जिसने 
तुम्हें चलना, सम्हलना 
और अपने "पैरों" पर 
खड़ा होना सिखाया है‌!

©Shalini Nigam

#पिता #Nojoto #yqdidi #yqbaba #Love #Life

11 Love

White पिता का वात्सल्य मां से बिल्कुल अलग होता है,एक क्षण पिता बच्चे को दुलार रहा होगा तो अगले ही क्षण उसे पीट रहा होगा. मां का वात्सल्य इसके विपरीत है,वो बच्चे की ज़िद,उनकी बदमाशी यूंही माफ कर देती है.मां का क्रोध बच्चे पर तब होता है जब उसकी किसी बात से उसका अहित हो रहा हो पर पिता बच्चे को दूसरों का अहित करने के लिए दण्ड देता है.आपने देखा होगा माएं बच्चों को कंधे पर नहीं बैठाती हैं ,वो उन्हें गोद में सुरक्षित रखना चाहतीं हैं,जबकि पिता बच्चे को अपनी उंगली के बाद सीधा अपना कंधा देता है बैठने के लिए, बिना डरे की वो नीचे गिर जाएगा,वो ऐसा करता है ताकि बच्चा दुनियां को एक ऊंचाई से देख सके,वो देख सके कि जमीन से ऊपर होते ही ये दुनियां कैसे अलग दिखने लगती है,छोटी दिखने लगती है.ताकि बच्चे में ये समझ बने कि उसे अपनी जगह कहां और कैसे बनानी है.पिता उसे परियों की कहानी नहीं सुनाता,चोट लगने पर रोने नहीं देता.जबकि बच्चे के लिए पिता बचपन में टॉफियां लाने वाला इंसान और जवानी में उसकी आजादियों पर ताला लगाने वाला हैवान से अधिक कुछ नहीं.पिता चाहे तो इस छवि को तोड़ सकता है,पर वो ऐसा नहीं करता क्योंकि पिता चाहता है कि बच्चा मजबूत बने,इतना मजबूत की जब उसे घर से बाहर जाना हो तो वो हिचके ना,इतना मजबूत की जीवन के किसी भी कठिन फैसले को लेने से वो डरे ना,इतना मजबूत की जब एक दिन उसे अपने पिता की अर्थी को कंधा देना हो तो कमजोर ना पड़े,टूट ना जाए,बल्कि वो याद करे कैसे बचपन में पिता ने उसे अपना कंधा दिया था.......! ©Andy Mann

#मोटिवेशनल #पिता  White पिता का वात्सल्य मां से बिल्कुल अलग होता है,एक क्षण पिता बच्चे को दुलार रहा होगा तो अगले ही क्षण उसे पीट रहा होगा. मां का वात्सल्य इसके विपरीत है,वो बच्चे की ज़िद,उनकी बदमाशी यूंही माफ कर देती है.मां का क्रोध बच्चे पर तब होता है जब उसकी किसी बात से उसका अहित हो रहा हो पर पिता बच्चे को दूसरों का अहित करने के लिए दण्ड देता है.आपने देखा होगा माएं बच्चों को कंधे पर नहीं बैठाती हैं ,वो उन्हें गोद में सुरक्षित रखना चाहतीं हैं,जबकि पिता बच्चे को अपनी उंगली के बाद सीधा अपना कंधा देता है बैठने के लिए, बिना डरे की वो नीचे गिर जाएगा,वो ऐसा करता है ताकि बच्चा दुनियां को एक ऊंचाई से देख सके,वो देख सके कि जमीन से ऊपर होते ही ये दुनियां कैसे अलग दिखने लगती है,छोटी दिखने लगती है.ताकि बच्चे में ये समझ बने कि उसे अपनी जगह कहां और कैसे बनानी है.पिता उसे परियों की कहानी नहीं सुनाता,चोट लगने पर रोने नहीं देता.जबकि बच्चे के लिए पिता बचपन में टॉफियां लाने वाला इंसान और जवानी में उसकी आजादियों पर ताला लगाने वाला हैवान से अधिक कुछ नहीं.पिता चाहे तो इस छवि को तोड़ सकता है,पर वो ऐसा नहीं करता क्योंकि पिता चाहता है कि बच्चा मजबूत बने,इतना मजबूत की जब उसे घर से बाहर जाना हो तो वो हिचके ना,इतना मजबूत की जीवन के किसी भी कठिन फैसले को लेने से वो डरे ना,इतना मजबूत की जब एक दिन उसे अपने पिता की अर्थी को कंधा देना हो तो कमजोर ना पड़े,टूट ना जाए,बल्कि वो याद करे कैसे बचपन में पिता ने उसे अपना कंधा दिया था.......!

©Andy Mann

#पिता @Arshad Siddiqui @Rakesh Srivastava @Ashutosh Mishra अदनासा- वैद्य (dr) उदयवीर सिंह

25 Love

White — Papa Ki Yaad Shayari पिता की याद में शायरी · 1. यूँ तो दुनिया के सारे गम मैं हंस के ढो लेता हूँ, · 2. मार-मार के पत्थर को एक जौहरी हीरा बनाता है, · 3. हाँ मैं खुश था उस बचपन में · 4. हर पल ©VIKHYAT REKWAR

 White — Papa Ki Yaad Shayari पिता की याद में शायरी · 1. यूँ तो दुनिया के सारे गम मैं हंस के ढो लेता हूँ, · 2. मार-मार के पत्थर को एक जौहरी हीरा बनाता है, · 3. हाँ मैं खुश था उस बचपन में · 4. हर पल

©VIKHYAT REKWAR

पिता की याद

14 Love

गुरु गोविंद सिंह जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं ©Sandeep Bunkar

#मोटिवेशनल #SunSet  गुरु गोविंद सिंह जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं

©Sandeep Bunkar

#SunSet मोटिवेशनल गुरु गोविंद सिंह

6 Love

White अगर इस धोखे भरे संसार में कोई तुमसे निस्वार्थ भाव से प्रेम करने वाला है तो वो सिर्फ तुम्हारे माता – पिता हैं। ©सूरज

#कोट्स #माता  White अगर इस धोखे भरे संसार में कोई तुमसे निस्वार्थ भाव से प्रेम करने वाला है तो वो सिर्फ तुम्हारे माता – पिता हैं।

©सूरज

#माता – पिता

22 Love

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