Rajnish Shrivastava

Rajnish Shrivastava

B.E.Civil झीलों की नगरी भोपाल में है मेरा आवास कुछ नया रचने का करता हूं नित प्रयास मन के भावों को कागज पर उतार देने से , दिल को महसूूस होता है सुखद अहसास ।।

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इन नजारों को देखकर यकीन नहीं होता कोई तो है जिसने इस प्रकृति को रचा होगा ©Rajnish Shrivastava

#प्रकृति #शायरी  इन नजारों को देखकर यकीन नहीं होता 
कोई तो है जिसने इस प्रकृति को रचा होगा

©Rajnish Shrivastava

कुछ लोग अपने आप से इतने निराश होते हैं । वह हर वक्त गम की तलाश में जी रहे होते हैं । जो मिला है उन्हें वो इसकी परवाह नहीं करते जो न मिला उसके गम में दिन रात रो रहे होते हैं । ©Rajnish Shrivastava

#शायरी #कुछ  कुछ लोग अपने आप से इतने निराश होते हैं ।
वह हर वक्त गम की तलाश में जी रहे होते हैं ।
जो मिला है उन्हें वो इसकी परवाह  नहीं करते 
जो न मिला उसके गम में दिन रात रो रहे होते हैं ।

©Rajnish Shrivastava

#कुछ लोग

14 Love

जब तक न मिले मंजिल सफर ये जारी रखना है । पांवो में दर्द भले हो पर मन को थकने न देना है । ©Rajnish Shrivastava

#शायरी #मंजिल  जब तक न मिले मंजिल सफर ये जारी रखना है ।
पांवो में दर्द भले हो पर मन को थकने न देना है ।

©Rajnish Shrivastava

चल पड़े हैं हम सफर में बांधकर सर पर कफन करके अपनी हमने सारी ख्वाहिशो को दफन ©Rajnish Shrivastava

#कफन_से_लिपटी_हुई_लाश_होग #शायरी  चल पड़े हैं हम सफर में बांधकर सर पर कफन 
करके अपनी हमने सारी ख्वाहिशो को दफन

©Rajnish Shrivastava

बर्फ की चादर ने धरा के रोम रोम को पुलकित कर दिया हर तरफ अपने आवरण से सब कुछ मनोहारी कर दिया ©Rajnish Shrivastava

#शायरी #बर्फ  बर्फ की चादर ने धरा के रोम रोम को पुलकित कर दिया 
हर तरफ अपने आवरण से सब कुछ मनोहारी कर दिया

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#बर्फ

15 Love

खुशी जो आज मिली मुझको देखकर इन नजारों को दिल को सुकून मिला भरपूर समेटकर इन फिजाओं को ©Rajnish Shrivastava

#शायरी #सुकून  खुशी जो आज मिली मुझको देखकर इन नजारों को 
दिल को सुकून मिला भरपूर समेटकर इन फिजाओं को

©Rajnish Shrivastava
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