जब तलक हाथों में थी, हाथों हाथ कभी न ली ज़िन्दगी !
जब लगी फिसलने हाथों से तब सोचा, ढंग से क्यों न जी पाए ज़िन्दगी !
अब कोई मागंने से मिल जाने वाली मुराद तो है नहीं ये ज़िन्दगी !
जो शुरू से शुरूआत करने को मिल जाएगी ज़िन्दगी !
इसीलिए कहता हूं अपनी कुर्सी की पेटियां बांध कर रखना !
अबकी जो आए तो बड़े एतमाद और
एहतियात से जीना ज़िन्दगी ।।
©Harish Raja
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