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आशा भरी किरण, कुछ यूँ ही बिखराई,
उम्मीदों के आगे, घर आंगन चेहकाई,
जगमग सितारों, की महफ़िल सजाई।
ख़ूबसूरती प्रकृति, की शोभा बढ़ाई।
अंजुमन में आभा, सूर्य की चमचमाई,
खेत-खलिहान में, फसलें देख लहराईं।
चारों तरफ किरणे, है आशा छलकाई।
बिखरती दुनिया ये, जिस रंग में रंगाई।
रंग-बिरंगी दुनिया, कुदरत ने हैँ बनाई,
दीप आशा के , प्रज्जवलित जलाई।
मुंद-मुंद करके, किरणे प्रकृति फैलाई।
बिखरती किरणे , आशाएँ रंग दिखलाई।
✍🏻हार्दिक महाजन
©Hardik Mahajan
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