BINOदिनी

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लफ्ज़ रुकते नहीं, जज्बात बयां होते नहीं। इस भरी महफिल में हसरतें मुक़म्मल होती नहीं।।

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रुसवा न हो जाए भरी महफ़िल में, हम डरा बहुत करते हैं। अभी तो हैं आप साथ में, हम तो कल के ख़ातिर आज मरा करते हैं।। ©BINOदिनी

#दिल्लगी #शायरी  रुसवा न हो जाए भरी महफ़िल में,
हम डरा बहुत करते हैं।
अभी तो हैं आप साथ में,
हम तो कल के ख़ातिर आज मरा करते हैं।।

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ऐसा लगता है, इन हवाओं में तुम बसे हो। ऐसा लगता है, इन गरजते बादलों में तुम छुपे हुए हो। वैसे तो हर जगह, हर नज़र में नज़र आते हो, मगर न जाने क्यों कुछ वक्त से बहुत मसरूफ़ हो गए हो। जनाब आपका मसरूफ़ होना, एक आम सी बात है। मगर वक़्त हर दम मयस्सर नहीं होता, यह एहसास करना एक जायज बात है।। ©BINOदिनी

#मुहब्बत #शायरी #वक़्त  ऐसा लगता है,
इन हवाओं में  तुम बसे हो।
ऐसा लगता है,
इन गरजते बादलों में तुम छुपे हुए हो।
वैसे तो हर जगह,
हर नज़र में नज़र आते हो,
मगर न जाने क्यों कुछ वक्त से बहुत मसरूफ़ हो गए हो।
जनाब आपका मसरूफ़ होना,
एक आम सी बात है।
मगर वक़्त हर दम मयस्सर नहीं होता,
यह एहसास करना एक जायज बात है।।

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यह हवाओं का यूँ रुख बदलना, किसी का पैगाम शायद लाए हैं। यह पत्तों का यूँ सरसराहट करना, शायद किसी को आवाज दे रहे हैं।। यूँ तो बुलाने के तरीके बहुत हैं, मगर बिन बुलाए कोई महसूस करले यही तो एहसास-ए-गम है।। ©BINOदिनी

#शायरी  यह हवाओं का यूँ रुख बदलना,
किसी का पैगाम शायद लाए हैं।
यह पत्तों का यूँ  सरसराहट करना,
शायद किसी को आवाज दे रहे हैं।।
यूँ तो बुलाने के तरीके बहुत हैं,
मगर बिन बुलाए कोई महसूस करले
यही तो एहसास-ए-गम है।।

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यह हवाओं का यूँ रुख बदलना, किसी का पैगाम शायद लाए हैं। यह पत्तों का यूँ सरसराहट करना, शायद किसी को आवाज दे रहे हैं।। यूँ तो बुलाने के तरीके बहुत हैं, मगर बिन बुलाए कोई महसूस करले यही तो एहसास-ए-गम है।। ©BINOदिनी

9 Love

वफ़ा करने की क्या बात करो, बेवफाई ही हमें पता नहीं। इश्क़ करना तुम सिखाओ, मोहब्बत में मिटने की सज़ा क्या होता है तुम्हें पता नहीं।। ©BINOदिनी

#मुहब्बत #शायरी  वफ़ा करने की क्या बात करो,
बेवफाई ही हमें पता नहीं।
इश्क़ करना तुम सिखाओ,
मोहब्बत में मिटने की सज़ा क्या  होता है तुम्हें पता नहीं।।

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तुम्हें पाने की आरज़ू में, मेरा गुरुर मिट रहा है। कल का किसको पता, मेरा तो आज रुक्सत हो रहा है।। ©BINOदिनी

#शायरी #mohabat  तुम्हें पाने की आरज़ू में,
मेरा गुरुर मिट रहा है।
कल का किसको पता,
मेरा तो आज रुक्सत हो रहा है।।

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#mohabat

10 Love

यह रिस्ते यह ख़यालात, यह बहते हुए जज़्बात। कहीं गुम क्यों न हो जाते, कहीं छुप क्यों न जाते। भरी महफ़िल रूसवा हम ऐसे न होते, बार बार दिल जोड़ने का सजा न भुगतते। ©BINOदिनी

#शायरी #attachment #Emotional  यह रिस्ते यह ख़यालात,
यह बहते हुए जज़्बात।
कहीं गुम क्यों न हो जाते,
कहीं छुप क्यों न जाते।
भरी महफ़िल रूसवा हम ऐसे न होते,
बार बार दिल जोड़ने का सजा न भुगतते।

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