English
लफ्ज़ रुकते नहीं, जज्बात बयां होते नहीं। इस भरी महफिल में हसरतें मुक़म्मल होती नहीं।।
रुसवा न हो जाए भरी महफ़िल में, हम डरा बहुत करते हैं। अभी तो हैं आप साथ में, हम तो कल के ख़ातिर आज मरा करते हैं।। ©BINOदिनी
BINOदिनी
15 Love
ऐसा लगता है, इन हवाओं में तुम बसे हो। ऐसा लगता है, इन गरजते बादलों में तुम छुपे हुए हो। वैसे तो हर जगह, हर नज़र में नज़र आते हो, मगर न जाने क्यों कुछ वक्त से बहुत मसरूफ़ हो गए हो। जनाब आपका मसरूफ़ होना, एक आम सी बात है। मगर वक़्त हर दम मयस्सर नहीं होता, यह एहसास करना एक जायज बात है।। ©BINOदिनी
16 Love
यह हवाओं का यूँ रुख बदलना, किसी का पैगाम शायद लाए हैं। यह पत्तों का यूँ सरसराहट करना, शायद किसी को आवाज दे रहे हैं।। यूँ तो बुलाने के तरीके बहुत हैं, मगर बिन बुलाए कोई महसूस करले यही तो एहसास-ए-गम है।। ©BINOदिनी
9 Love
वफ़ा करने की क्या बात करो, बेवफाई ही हमें पता नहीं। इश्क़ करना तुम सिखाओ, मोहब्बत में मिटने की सज़ा क्या होता है तुम्हें पता नहीं।। ©BINOदिनी
तुम्हें पाने की आरज़ू में, मेरा गुरुर मिट रहा है। कल का किसको पता, मेरा तो आज रुक्सत हो रहा है।। ©BINOदिनी
10 Love
यह रिस्ते यह ख़यालात, यह बहते हुए जज़्बात। कहीं गुम क्यों न हो जाते, कहीं छुप क्यों न जाते। भरी महफ़िल रूसवा हम ऐसे न होते, बार बार दिल जोड़ने का सजा न भुगतते। ©BINOदिनी
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