तुम्ही को लिख रहा हूँ मैं , तुम्ही को गा रहा हूँ मैं
हाँ एक पागल परिंदा हूँ जो फड़फड़ा रहा हूँ मैं
मेरे तो अश्कों की बारात भी उन तक ना पहुँची
यहीं देखो कोरे पन्नो को भिगाए जा रहा हूँ मैं
इश्क़ को पाने का मेरा अंदाज़ तो देखो तुम
दो बहनों को ही कागज़ पर मिलाए जा रहा हूँ मै
सुनो हिचिकियाँ आजकल चर्म पर है मेरी
खबर ये है कि तुम्हे भी याद आ रहा हूँ मैं
उस बेवफ़ा को हो सके तो ज़रा इत्तला कर दो
हाँ कल फिर वापिस अपने शहर आ रहा हूँ मैं ।
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