मैं कैसे भुला दूं उसके संग बीते वक्त के लम्हों को | हिंदी कविता Video

"मैं कैसे भुला दूं उसके संग बीते वक्त के लम्हों को उन लम्हों की यादों में अपने ख्वाबों जहां बसा रखा है फिर बिखर जाने के डर से उसकी नजदीकियों से डरने लगी हूं प्यार तो करती हूं उससे मगर उसके बेपरवाही के रवैए से बिखरने लगी हूं उसकी नजरों को भाए मेरी काया ,मैंने खुद को बिलकुल वैसे ही सजाया प्यार तो बहुत उससे करने लगी हूं मगर उसकी बेफिक्री से अब डरने लगी हूं अक्सर रुला देता है वो अब इसलिए अब काजल नहीं लगाती डरती हूं दूरियों से तो खुद को अब बहानों से बहलाकर पागल नहीं बनाती तबाह होने लगी हूं उसकी मुहब्बत में इसलिए वफा की आस अब नहीं सजाती ©kavya soni "

मैं कैसे भुला दूं उसके संग बीते वक्त के लम्हों को उन लम्हों की यादों में अपने ख्वाबों जहां बसा रखा है फिर बिखर जाने के डर से उसकी नजदीकियों से डरने लगी हूं प्यार तो करती हूं उससे मगर उसके बेपरवाही के रवैए से बिखरने लगी हूं उसकी नजरों को भाए मेरी काया ,मैंने खुद को बिलकुल वैसे ही सजाया प्यार तो बहुत उससे करने लगी हूं मगर उसकी बेफिक्री से अब डरने लगी हूं अक्सर रुला देता है वो अब इसलिए अब काजल नहीं लगाती डरती हूं दूरियों से तो खुद को अब बहानों से बहलाकर पागल नहीं बनाती तबाह होने लगी हूं उसकी मुहब्बत में इसलिए वफा की आस अब नहीं सजाती ©kavya soni

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