रोटी के आधार पिता
मां अगर आधार धरती जस
पिता जगत का आकाश है
मां ममता की पाठशाला तो
कर्म सिखाते पिता पास हैं
मां खिलाती रोटी पकाकर
इस रोटी के आधार पिता
हम ख्वाहिश रखते सिर्फ
पूरा करने को बाजार पिता
पैरों मे छाले पड़ते उनके
पर कभी ना मानते हार पिता
कैसे पाला जाता परिवार को
हमें सिखाते संस्कार पिता
खुद ही झेल लेते वो परेशानी
हमें देख ना सकते लाचार पिता
जरूरत पर मजधार जिंदगी के
जरूरत पर खेवनहार पिता
हम जहां तक सोच सकते हैं
उस सोच के पार पिता
मेरी तस्वीर दिखती दुनिया में
वो हैं चित्राधार पिता
©P S Jha
#father